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झारखंड में भी बढ़ी हलचल, बीएलओ की दस्तक से SIR की आहट तेज!

Bokaro News: बोकारो जिले के बेरमो इलाके में इन दिनों सुबह-सुबह दरवाजे पर दस्तक सुनाई दे रही है। बाहर खड़े होते हैं बूथ लेवल ऑफिसर- बीएलओ। हाथ में बंडल भरी फाइलें, टैबलेट और पुरानी मतदाता सूची। लोग थोड़ा हैरान भी हैं, क्योंकि झारखंड आधिकारिक तौर

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Bokaro News: बोकारो जिले के बेरमो इलाके में इन दिनों सुबह-सुबह दरवाजे पर दस्तक सुनाई दे रही है। बाहर खड़े होते हैं बूथ लेवल ऑफिसर- बीएलओ। हाथ में बंडल भरी फाइलें, टैबलेट और पुरानी मतदाता सूची। लोग थोड़ा हैरान भी हैं, क्योंकि झारखंड आधिकारिक तौर पर उन 12 राज्यों में शामिल नहीं है जहां एसआईआर (SIR)- यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन– चल रहा है। इसके बावजूद बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की मैपिंग और दस्तावेजों का सत्यापन कर रहे हैं।

यह साफ संकेत है कि झारखंड में भी एसआईआर (SIR) अब दूर नहीं है।

क्या है एसआईआर (SIR) और क्यों बढ़ी सरगर्मी?

एसआईआर (SIR) कोई सामान्य जांच नहीं होती। यह चुनाव आयोग की वो प्रक्रिया है जिसमें पूरी मतदाता सूची को घर-घर जाकर दोबारा सत्यापित किया जाता है। गलत नाम हटाना, डुप्लिकेट साफ करना और पुराने रिकॉर्ड एडजस्ट करना इसका हिस्सा होता है। जैसे बिहार में हुआ, झारखंड में भी वही तैयारी शुरुआती स्तर पर दिखने लगी है।

बीएलओ लोगों को एक खास बात समझा रहे हैं- अगर किसी मतदाता के माता-पिता का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, तो दादा-दादी का नाम जरूरी माना जाएगा।

कई लोग इस नियम को सुनकर चौंक जाते हैं, लेकिन बीएलओ धैर्य से समझा रहे हैं कि यह सिर्फ पहचान सत्यापन के लिए है, नाम हटाने का आदेश फिलहाल नहीं है।

नाम हटने का डर? प्रशासन ने दी सफाई

बेरमो अंचल कार्यालय की ओर से साफ कहा गया कि किसी का नाम काटने की कोई कार्रवाई अभी नहीं हो रही।
अगर दस्तावेज़ पूरे नहीं हैं, तो पहले नोटिस भेजा जाएगा। उसके बाद भी अगर कागज जमा न हों, तभी चुनाव आयोग निर्णय लेगा।

और सबसे अहम बात- मतदाता सूची से नाम हटने का यह मतलब नहीं है कि किसी योजना- जैसे पेंशन, राशन कार्ड, मंईयां सम्मान- से वंचित कर दिया जाएगा।

देशभर में कहां-कहां चल रहा है एसआईआर (SIR)?

पहला चरण बिहार में पूरा हो चुका है।
दूसरा चरण फिलहाल नौ राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है-
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, गोवा
और
पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप।

इस बार 51 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन हो रहा है और अंतिम सूची 7 फरवरी 2026 को जारी करने की योजना है।

बेरमो में चल रही यह हलचल बताती है कि झारखंड भी जल्द इस व्यापक सत्यापन अभियान के दायरे में आने वाला है।

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