रांची: राजधानी के होटल्स में जब सियासत और व्यापार की चर्चाएं आम होती हैं, वहीं शुक्रवार, 23 मई को एक अलग ही नजारा देखने को मिला। मौका था ‘लोक सेवा समिति’ की 35वीं वर्षगांठ का। राजधानी के प्रतिष्ठित होटल ‘द केन’ में आयोजित इस भव्य समारोह ने न सिर्फ संस्था के साढ़े तीन दशकों के सफर का जश्न मनाया, बल्कि समाजसेवा, कला-संस्कृति और जनजागरूकता का एक नया खाका भी खींचा। कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य, और जनसेवा से जुड़ी कई जानी-मानी हस्तियों ने शिरकत की।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित ‘प्रेरणा’ का विमोचन
समिति के अध्यक्ष मोहम्मद नौशाद ने कार्यक्रम की कमान संभालते हुए कहा कि संस्था पिछले 35 वर्षों से जमीन पर उतरकर काम कर रही है। इस मील के पत्थर को यादगार बनाने के लिए एक विशेष स्मारिका और कॉफी टेबल बुक “प्रेरणा” का विमोचन किया गया। यह पुस्तक झारखंड के आंदोलनकारी और पूर्व मुख्यमंत्री ‘दिशोम गुरु’ शिबू सोरेन के संघर्षमय जीवन, उनके सामाजिक और राजनीतिक सफरनामे को समर्पित है। इसका उद्देश्य आज की भटकती युवा पीढ़ी को एक नई दिशा और ऊर्जा देना है।
प्रतिभाओं का सम्मान और पद्मश्री की अनुशंसा
इस शाम की सबसे खूबसूरत चमक तब बिखरी जब समाज और संस्कृति के रखवालों को सम्मानित किया गया। उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को राज्य के प्रतिष्ठित “झारखंड रत्न” और “विशिष्ट सेवा सम्मान 2026” से नवाजा गया। इसके साथ ही समिति ने एक बड़ा ऐलान करते हुए झारखंड की मशहूर लोक गायिका सीमा देवी के नाम की अनुशंसा केंद्र सरकार को “पद्मश्री” सम्मान के लिए भेजने की बात कही। सीमा देवी ने झारखंड की माटी की खुशबू को राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया है।
नशाखोरी और मोबाइल एडिक्शन के खिलाफ सामूहिक हुंकार
आज का युवा जिस तरह से वर्चुअल दुनिया और नशे के जाल में फंस रहा है, उस पर समारोह में गहरी चिंता जताई गई। समिति ने इसे केवल एक समस्या नहीं बल्कि सामाजिक महामारी माना। इसके समाधान के लिए कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को नशामुक्ति और मोबाइल की लत से दूर रहने की सामूहिक शपथ दिलाई गई। समिति ने संकल्प लिया कि वे इस अभियान को केवल वीआईपी कमरों तक सीमित न रखकर गांव-गांव और गली-गली तक ले जाएंगे।
अफसरशाही और अंचल कार्यालयों की सुस्ती पर प्रहार
समारोह में जनता के दर्द को भी पुरजोर तरीके से उठाया गया। समिति ने राज्य सरकार से मांग की कि अंचल (सीओ) स्तर पर आम नागरिकों के काम समय पर होने चाहिए। वक्ताओं ने तीखे तेवर अपनाते हुए कहा कि आज भी छोटे-छोटे जाति, आवासीय या जमीन से जुड़े कागजातों के लिए आम जनता को दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना बेहद जरूरी है।
जब मुख्य अतिथि बंधु तिर्की ने याद किए पुराने दिन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बंधु तिर्की ने अपने भाषण से माहौल में हल्के-फुल्के पल बिखेर दिए। उन्होंने समिति के अध्यक्ष नौशाद आलम के बचपन का एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया, “जब मैं राजनीति से दूर कोचिंग चलाता था, तब नौशाद पढ़ाई में थोड़े कमजोर थे। लेकिन सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने मैट्रिक में 65% अंक हासिल किए।” उन्होंने समिति के 35 वर्षों के सफर को राज्य के लिए एक मिसाल बताया। वहीं पूर्व राज्यसभा प्रत्याशी शहजादा अनवर ने भी संस्था की निरंतरता को एक बड़ी उपलब्धि करार दिया।



