रांची: राजधानी में बिजली के पोल पर लगे इंटरनेट और केबल तारों को काटे जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। पिछले करीब दो सप्ताह से शहर के अलग-अलग इलाकों में बिना पूर्व सूचना के केबल काटे जाने से इंटरनेट सेवा प्रभावित हो रही है। अब इसका असर खुद हाईकोर्ट की इंटरनेट कनेक्टिविटी पर भी पड़ा है।
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। सुनवाई के दौरान JBVNL के CMD भी अदालत में मौजूद रहे। कोर्ट ने सरकार से इंटरनेट सेवा बाधित होने पर जवाब मांगा।
हाईकोर्ट की इंटरनेट सेवा तुरंत बहाल करने का आदेश
अदालत ने कहा कि इंटरनेट सेवा बाधित होने से आम लोगों के साथ सरकारी संस्थानों का काम भी प्रभावित हो रहा है। कोर्ट ने सवाल किया कि हाईकोर्ट की इंटरनेट सेवा बाधित होने के बावजूद इसे अब तक ठीक क्यों नहीं किया गया।
अदालत ने हाईकोर्ट की इंटरनेट कनेक्टिविटी तत्काल बहाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इंटरनेट जैसी जरूरी सेवा बाधित होने से न्यायिक कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
झूलते तारों पर भी कोर्ट सख्त
यह मामला रांची में बिजली के पोल पर अव्यवस्थित तरीके से लगाए गए केबल और इंटरनेट तारों को लेकर हाईकोर्ट के स्वत: संज्ञान से शुरू हुई जनहित याचिका से जुड़ा है।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि शहर में किन टेलीकॉम कंपनियों को केबल लगाने की अनुमति दी गई है और नीचे झूल रहे तारों के लिए जिम्मेदारी किसकी है।
हाईकोर्ट ने JBVNL के CMD से यह भी पूछा कि लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई है।
कोर्ट ने साफ कहा कि सार्वजनिक ढांचे और बिजली के पोल का मनमाने तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। साथ ही केबल हटाने की कार्रवाई से पहले इंटरनेट जैसी जरूरी सेवाओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए उचित व्यवस्था और समन्वय जरूरी है।




