Ranchi: झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक बड़ा भूचाल आ गया है। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव आलोक कुमार दुबे ने अपने सहयोगी दलों पर गठबंधन के साथ बड़ा विश्वासघात करने का सीधा आरोप लगाया है। दुबे ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माले) ने निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी से मोटी रकम (पैसे) लेकर उनके पक्ष में वोट किया है। उन्होंने इसे एक ‘कड़वा सच’ बताते हुए कहा कि अब अपने बचाव के लिए राजद नेता कांग्रेस नेतृत्व पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
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“बीजेपी एजेंट की तरह काम कर रहे थे भोला यादव”
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राजद ने सिर्फ कांग्रेस और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के साथ खड़े रहने का झूठा दिखावा किया था। उन्होंने राजद नेता भोला यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वे राजद के प्रतिनिधि के रूप में नहीं, बल्कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के एजेंट की तरह कार्य करते दिखाई दिए। इसके साथ ही उन्होंने माले पर भी गठबंधन की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया। कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों के बाद अब राजद ने भी पलटवार करना शुरू कर दिया है।
क्रॉस वोटिंग से ध्यान भटका रही है राजद
दूसरी तरफ, प्रदेश कांग्रेस के एक अन्य महासचिव लाल किशोर नाथ शाहदेव ने कांग्रेस नेता के. राजू पर लगाए गए तमाम आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि राजू की ईमानदारी पर कोई भी सवाल नहीं उठा सकता है। शाहदेव ने साफ तौर पर कहा कि इस चुनाव में बड़े पैमाने पर ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ (विधायकों की खरीद-फरोख्त) हुई है। राजद अब क्रॉस वोटिंग के अपने गुनाह से जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आत्ममंथन की बात पर राजद नेताओं को इतनी मिर्ची क्यों लग रही है? यदि वे पूरी तरह साफ-सुथरे थे, तो उन्हें चुनाव समीक्षा से डरने की कोई जरूरत नहीं थी। कांग्रेस ने हमेशा गठबंधन धर्म निभाया है, पर इस तरह छुरा घोंपने पर पार्टी चुप नहीं बैठेगी।
संसदीय कार्यमंत्री ने गणित समझाकर उठाए सवाल
इस पूरे विवाद के बीच कांग्रेस कोटे से संसदीय कार्यमंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी एक बड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने कहा कि वैचारिक शून्यता के दौर से गुजर रही झारखंड की राजनीति अब एक खुले बाजार की शक्ल ले चुकी है, जहां पूंजी की खनक साफ तौर पर सुनाई दे रही है। किशोर ने कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी की हार पूरे महागठबंधन की सामूहिक हार है।
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उन्होंने वोटों का गणित समझाते हुए कहा कि महागठबंधन दल की बैठक में यह लिखित तय हुआ था कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) प्रत्याशी के कोटे में 30 वोट डाले जाएंगे और कांग्रेस प्रत्याशी के खाते में प्रथम वरीयता के 26 वोट जाएंगे। इसके बाद झामुमो के शेष चार सदस्य द्वितीय वरीयता के अपने चार वोट कांग्रेस प्रत्याशी को ट्रांसफर करेंगे। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में प्रथम वरीयता के 26 वोट और द्वितीय वरीयता के चार वोट की कुल गणना 2.96 होती। इन दोनों को जोड़कर कांग्रेस प्रत्याशी को आसानी से 28.96 वोट मिल जाते और उनकी जीत सुनिश्चित हो जाती। लेकिन इसके उलट कांग्रेस प्रत्याशी को प्रथम वरीयता के मात्र 20 ही वोट मिले। उन्होंने सवाल दागा कि आखिर शेष छह वोट कहाँ गायब हो गए और क्यों नहीं मिले?
के. राजू के समर्थन में उतरीं कृषि मंत्री
वहीं, सूबे की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी कांग्रेस के झारखंड प्रभारी के. राजू का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग राजनीतिक द्वेष में आकर के. राजू पर अनर्गल और पूरी तरह भ्रामक टिप्पणियां कर रहे हैं। शायद ऐसे लोगों को यह बुनियादी जानकारी नहीं है कि उनका पूरा जीवन हमेशा से गरीबों, किसानों, आदिवासियों, पिछड़ों और वंचित समाज के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित रहा है। तिर्की ने कहा कि उन पर कोई भी ओछी टिप्पणी करने से पहले उनके सामाजिक योगदान और उपलब्धियों का ठीक से अध्ययन कर लेना चाहिए। बिना किसी पुख्ता तथ्य और प्रमाण के खुलेआम झूठ बोलने वाले लोग असल में अपनी छोटी सोच और गिरती विश्वसनीयता का स्वयं परिचय दे रहे हैं।
