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झारखंड में ‘पेसा’ राज की दस्तक! अब ग्राम सभा के हाथ में होगी असली ताकत

Ranchi News: झारखंड की राजनीति और सामाजिक ढांचे के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली (PESA Rules) को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आदिवासी समुदाय में खुशी की लहर है। जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) के पूर्व सदस्य

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Ranchi News: झारखंड की राजनीति और सामाजिक ढांचे के लिए आज का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ है। राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली (PESA Rules) को कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद आदिवासी समुदाय में खुशी की लहर है। जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) के पूर्व सदस्य रतन तिर्की ने इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को बधाई दी है। तिर्की ने कहा कि इस नियमावली के लागू होने से गांव के अंतिम व्यक्ति को न्याय मिलना सुनिश्चित होगा, हालांकि उन्होंने इसे जमीन पर उतारने के दौरान सावधानी बरतने की भी सलाह दी है।

चार महीने की कड़ी मेहनत और 12 दिग्गजों की टीम का कमाल

रतन तिर्की ने खुलासा किया कि इस जटिल नियमावली को तैयार करने के पीछे एक बड़ी टीम की दिन-रात की मेहनत छिपी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ‘डॉ. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान’ (TRI) में डॉ. रणेंद्र कुमार की अगुवाई में एक विशेष टीम गठित की गई थी। इस टीम ने लगातार चार महीनों तक देश के विभिन्न राज्यों में लागू पेसा कानूनों का बारीकी से अध्ययन किया। इस महत्वपूर्ण ड्राफ्टिंग टीम में डॉ. रणेंद्र कुमार, सुधीर पाल, प्रभाकर तिर्की, बलराम जी, रतन तिर्की, रश्मि कात्यायन, जॉनसन टोपनो, दयामनी बारला, डॉ. रामचंद्र उरांव, एलिना होरो, सुषमा बिरूली और नेहा जैसे गणमान्य लोग शामिल थे।

ग्राम सभा का सशक्तिकरण ही असली चुनौती

रतन तिर्की ने जोर देते हुए कहा कि केवल कानून का बन जाना काफी नहीं है, बल्कि सबसे बड़ी चुनौती ग्राम सभा को सशक्त बनाने की है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा ही पेसा कानून की आत्मा है। यदि गांवों में ग्राम सभा मजबूत होगी, तभी आदिवासी समाज अपने जल, जंगल और जमीन की रक्षा प्रभावी ढंग से कर पाएगा। पेसा नियमावली के माध्यम से अब गांवों के विकास और स्वशासन में स्थानीय लोगों की भागीदारी सर्वोपरि होगी, जो आत्मनिर्भर झारखंड की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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