New Delhi: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर शुक्रवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ। ‘ज्ञानेश गो बैक’ के नारों के साथ सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड्स तोड़कर जंतर मंतर की ओर बढ़ने का प्रयास किया। सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज समेत 100 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
बिना अनुमति प्रदर्शन: धारा 163 लागू होने पर लाठीचार्ज
इस विरोध मार्च का संयुक्त आह्वान वामपंथी छात्र संगठनों आइसा (AISA), एसएफआई (SFI) और डीवायएफआई (DYFI) द्वारा किया गया था। नई दिल्ली जिले में पहले से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती धारा 144) लागू होने के कारण दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की आधिकारिक अनुमति नहीं दी थी। प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रतिबंधित क्षेत्र में जबरन प्रवेश करने की कोशिश के बाद पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तितर-बितर किया और कई प्रमुख नेताओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया।
सुरक्षा घेरा सख्त: 1.5 किमी में इंटरनेट ठप, 11 मेट्रो स्टेशन बंद
हालात की संवेदनशीलता को देखते हुए गृह विभाग के निर्देश पर जंतर मंतर के लगभग 1.5 किलोमीटर के दायरे में सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गईं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने जनपथ, पटेल चौक और केंद्रीय सचिवालय समेत 11 प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों के प्रवेश और निकास पर रोक लगा दी, हालांकि इन स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा सामान्य रूप से जारी रही।
13 करोड़ नामों पर सवाल: एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग
यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब चुनाव आयोग द्वारा 20 राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठक कर छूटे हुए नामों को जोड़ने का निर्देश दिया गया था। प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान देशभर से कथित रूप से करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। छात्र और विपक्षी दल इस पूरी प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।




