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देवेंद्र सिंह का JMM पर आरोप, “झारखंड की संस्कृति और आदिवासी हित दिखावटी”

Jharkhand News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) जमशेदपुर जिला के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश कार्य समिति सदस्य देवेंद्र सिंह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके प्रदर्शन को “दिखावटी” और “नाटकीय” करार दिया है। उन्होंने कहा कि 27 मई को JMM द्वारा

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Jharkhand News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) जमशेदपुर जिला के पूर्व अध्यक्ष और प्रदेश कार्य समिति सदस्य देवेंद्र सिंह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके प्रदर्शन को “दिखावटी” और “नाटकीय” करार दिया है। उन्होंने कहा कि 27 मई को JMM द्वारा झारखंड की संस्कृति बचाने के नाम पर जिला उपायुक्त कार्यालय के समक्ष तीर-धनुष लेकर किया गया प्रदर्शन वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

देवेंद्र सिंह का JMM पर आरोप, प्रदर्शन को बताया दिखावटी

BJP नेता देवेंद्र सिंह

देवेंद्र सिंह ने कहा कि वास्तविक चिंता का विषय झारखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां आदिवासियों को धर्मांतरण के लिए लक्षित किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईसाई मिशनरियां धन का लालच देकर भोले-भाले आदिवासियों को गुमराह कर रही हैं, जबकि “लव जिहाद” के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है और उनकी जमीनें हड़पी जा रही हैं।

BJP नेता ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया प्रखंड के एक गांव में, जहां एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता, वहां सरकारी दस्तावेजों में 400 मुस्लिम बच्चों के जन्म का रिकॉर्ड दर्ज है। उन्होंने मैया सम्मान योजना में बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि इस योजना का लाभ हजारों रोहिंग्या और बांग्लादेशी मुसलमानों को अवैध रूप से दिया गया है।

सिंह ने सवाल उठाया कि JMM और कांग्रेस ने इन मुद्दों पर चुप्पी क्यों साध रखी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस “षड्यंत्र” में इन दलों के जनप्रतिनिधि और नेता भी शामिल हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूछा कि जिन लोगों ने धोखाधड़ी करके मैया सम्मान योजना का पैसा प्राप्त किया है, उनके खिलाफ अभी तक फौजदारी मुकदमा क्यों नहीं दर्ज किया गया है।

देवेंद्र सिंह ने अपने बयान के अंत में झारखंड के आदिवासी समुदायों को सतर्क रहने और “रंगे हुए सियारों” से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि BJP इस मुद्दे को राज्यव्यापी आंदोलन के रूप में उठाएगी और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएगी।

झारखंड सरकार या JMM की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों के मद्देनजर राज्य में आदिवासी पहचान और संस्कृति के मुद्दे पर राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ सकता है।

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