New Delhi: मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच आवागमन को तेज और आसान बनाने के लिए एक बड़ा हाई-स्पीड कॉरिडोर नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। इस एकीकृत सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद जबलपुर से प्रयागराज और वाराणसी तक की यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। यह योजना मुख्य रूप से तीन बड़े कॉरिडोर को आपस में जोड़कर तैयार की जा रही है, जो दोनों राज्यों के बुंदेलखंड और विंध्य अंचल के लिए एक प्रमुख जीवन रेखा बनेगी।
9,850 करोड़ रुपये से बनेगा 227 किमी लंबा सागर-सतना एक्सप्रेसवे
इस नेटवर्क की पहली और अहम कड़ी सागर-सतना एक्सप्रेसवे है। लगभग 227 किलोमीटर लंबा यह फोर-लेन ग्रीनफील्ड मार्ग करीब 9,850 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार होगा। यह कॉरिडोर सागर, दमोह, पन्ना, कटनी और मैहर से होते हुए सतना तक पहुंचेगा। इसके बन जाने के बाद सागर और सतना के बीच का सफर, जिसमें अभी 7 से 8 घंटे लगते हैं, घटकर मात्र 3 से 4 घंटे रह जाएगा।
प्रयागराज से सोनभद्र तक जुड़ेगा 330 किमी लंबा विंध्य एक्सप्रेसवे
नेटवर्क का दूसरा बड़ा हिस्सा विंध्य एक्सप्रेसवे है। लगभग 320 से 330 किलोमीटर लंबा यह सिक्स-लेन कॉरिडोर प्रयागराज से शुरू होकर मिर्जापुर, वाराणसी और चंदौली होते हुए सोनभद्र तक जाएगा। इससे मध्य प्रदेश के रीवा, सतना, सीधी और शहडोल जिलों को उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से सीधी और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी। साथ ही, प्रयागराज-जबलपुर-नागपुर कॉरिडोर को भी केंद्र और राज्य सरकार की बड़ी सड़क परियोजना में शामिल किया गया है।
टेंडर और डीपीआर चरण में परियोजना, व्यापार और धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बल
इस पूरे नेटवर्क के तैयार होने से भोपाल से रीवा और प्रयागराज की दूरी भी काफी घट जाएगी। यह ढांचा सीधे तौर पर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और यूपी के एक्सप्रेसवे नेटवर्क से जुड़ेगा। फिलहाल ये सभी परियोजनाएं डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और टेंडर प्रक्रिया के चरण में हैं। जमीन पर काम पूरा होने के बाद जबलपुर से वाराणसी तक व्यापार, रियल एस्टेट और धार्मिक पर्यटन को गति मिलेगी।




