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ट्रंप की बढ़ी टेंशन: ईरान की ‘तीन शर्तें’ और रूस का साथ, झुकेगा अमेरिका?

मॉस्को, (रूस) | एजेंसी अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए वैश्विक कूटनीति अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। रूस का खुला समर्थन मिलने के बाद ईरान के तेवर और कड़े हो गए हैं। ईरान के विदेश

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मॉस्को, (रूस) |  एजेंसी

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करने के लिए वैश्विक कूटनीति अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। रूस का खुला समर्थन मिलने के बाद ईरान के तेवर और कड़े हो गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मॉस्को में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कर यह साफ कर दिया है कि तेहरान समझौते के लिए तैयार है, लेकिन वह अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा। ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के बदले ट्रंप प्रशासन के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं, जिसने व्हाइट हाउस की नींद उड़ा दी है।

ईरान की शर्तों में सबसे प्रमुख मांग तुरंत और स्थायी युद्धविराम की है। इसके साथ ही वह अपनी सुरक्षा की पुख्ता गारंटी चाहता है। सबसे चौंकाने वाला कदम ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की ओर से आया है। एक नए प्रस्तावित कानून के तहत होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों से अब डॉलर के बजाय केवल ईरानी मुद्रा ‘रियाल’ में टैक्स वसूला जाएगा। यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित करेगा, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अमेरिकी डॉलर के दबदबे को भी सीधी चुनौती देगा।

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व्हाइट हाउस की ओर से आए बयानों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस नए प्रस्ताव पर अपनी एक विशेष ‘नेशनल सिक्योरिटी टीम’ के साथ मंथन कर रहे हैं। यह टीम उनकी पारंपरिक परिषद से अलग है, जिसमें गुप्त रूप से कुछ खास विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। दूसरी ओर, ईरान ने अपनी सशस्त्र सेनाओं को होर्मुज जलमार्ग की पूरी जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी कर ली है। बातचीत फिलहाल होर्मुज से शुरू होकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जाकर अटक गई है, क्योंकि अमेरिका पहले परमाणु पाबंदियों की बात कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रंप ईरान की इन शर्तों को स्वीकार करते हैं, तो दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट से बच सकती है। लेकिन अगर गतिरोध बरकरार रहा, तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और महंगाई का खतरा और गहरा जाएगा। रूस का साथ मिलने से ईरान का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है, जो इस कूटनीतिक जंग को और अधिक रोचक बना रहा है।

डॉलर बनाम रियाल: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर खतरा

ईरान का जलमार्ग पर ‘रियाल’ लागू करने का फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है और यहां से गुजरने वाली हर बूंद पर अब ईरान अपनी मुद्रा का नियंत्रण चाहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि रूस और चीन जैसे देश इस कदम का समर्थन करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की साख को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है।

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