Tehran, Iran: पश्चिम एशिया के सुलगते हालात के बीच ईरान ने अपनी सैन्य नीति में एक बड़ा और आक्रामक बदलाव किया है। ईरानी सेना के प्रवक्ता मोहम्मद अकरमिनिया ने एक साक्षात्कार में दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि जरूरत पड़ी, तो ईरान दुश्मन के किसी भी संभावित हमले के इंतजार में बैठने के बजाय, खतरे को टालने के लिए पहले सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। अकरमिनिया के इस बयान ने क्षेत्रीय राजनीति और सुरक्षा हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
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रक्षात्मक से आक्रामक हुई ईरान की सैन्य रणनीति
ईरानी सेना के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि देश ने अब अपनी पारंपरिक रक्षात्मक सैन्य रणनीति को पूरी तरह से बदलकर आक्रामक रुख अपना लिया है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल के साथ हुए तनावपूर्ण हालातों और संघर्षों के दौरान इसी नई आक्रामक रणनीति पर काम किया गया था।
इस बदली हुई नीति के तहत ईरानी सशस्त्र बलों ने कई बड़े सैन्य अभियानों को अंजाम दिया है। उदाहरण के तौर पर, जुलाई के आखिर में जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हुआ मिसाइल हमला इसी रणनीति का हिस्सा था। इसके अलावा, पिछले कुछ महीनों के दौरान इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद उन ठिकानों पर भी लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए हैं, जिन्हें तेहरान सरकार ‘क्रांति विरोधी’ और ‘अलगाववादी’ संगठन मानती है।
अमेरिकी जमीनी हमले की संभावना को किया खारिज
अमेरिका की ओर से ईरान पर किसी भी तरह के संभावित जमीनी हमले के सवाल पर अकरमिनिया ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि उनके आकलन के अनुसार अमेरिका कभी भी ईरान पर जमीनी हमला करने का जोखिम उठाने की हिम्मत नहीं करेगा।
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उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजरायल के साथ हुए पिछले संघर्षों से सबक लेते हुए ईरानी सेना ने अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता और रेंज को बढ़ाने पर विशेष जोर देने का फैसला किया है। इस युद्ध के दौरान यह महसूस किया गया कि दुश्मन देशों ने अपनी सेनाओं और सैन्य ठिकानों को ईरान के तटों से काफी दूर, यानी करीब एक हजार किलोमीटर की दूरी पर तैनात कर रखा है। इसी जरूरत को देखते हुए ईरान ने अपनी मिसाइलों को लगातार अपग्रेड करने का काम शुरू कर दिया है।
और अधिक तेज और सटीक होंगी आने वाली मिसाइलें
अकरमिनिया ने दावा किया कि ईरान ने अपनी बैलिस्टिक और अन्य मिसाइलों की गति (Speed) और सटीकता (Accuracy) में अभूतपूर्व सुधार किए हैं। देश की रक्षा प्रयोगशालाओं में तैयार की जा रही नई मिसाइलें पिछली पीढ़ियों की तुलना में कहीं अधिक तीव्र गति से वार करने और सटीक निशाना साधने में सक्षम होंगी।
पश्चिम एशिया में लगातार बिगड़ते समीकरणों के बीच ईरान के इस आक्रामक रुख से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में इस क्षेत्र में सामरिक तनाव और अधिक बढ़ सकता है।





