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महायुद्ध का आगाज: ईरान का 8 देशों पर मिसाइल हमला, दुबई-दोहा में धमाके

Tehran, (Iran): शनिवार को मध्य पूर्व में शांति के तमाम प्रयास धुआं-धुआं हो गए। परमाणु वार्ता के बीच अचानक इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त सैन्य अभियान शुरू करते हुए ईरान के खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के कार्यालय को निशाना बनाया।

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Tehran, (Iran): शनिवार को मध्य पूर्व में शांति के तमाम प्रयास धुआं-धुआं हो गए। परमाणु वार्ता के बीच अचानक इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त सैन्य अभियान शुरू करते हुए ईरान के खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के कार्यालय को निशाना बनाया। इस भीषण एयरस्ट्राइक में दक्षिणी ईरान के मिनाब में एक गर्ल्स स्कूल भी तबाह हो गया, जिसमें 57 छात्राओं की मौत की खबर ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है।

ईरान का ‘ऐलान-ए-जंग’: 8 देशों पर एक साथ हमला

अपने ऊपर हुए हमले के जवाब में ईरान ने ‘प्रलयंकारी’ पलटवार किया है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इजरायल समेत मध्य पूर्व के 8 देशों—सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, कुवैत, कतर और यूएई—में स्थित अमेरिकी सैन्य और नौसैनिक अड्डों पर करीब 400 बैलिस्टिक मिसाइलें और दर्जनों आत्मघाती ड्रोन दागे हैं।

धमाकों से दहले दुबई और दोहा

ईरानी मिसाइलों की जद में खाड़ी के सबसे प्रमुख शहर आए हैं:

  • UAE: दुबई और अबू धाबी में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जहां एक व्यक्ति की मौत की खबर है। अल धफरा एयर बेस को भी निशाना बनाया गया।

  • कतर: राजधानी दोहा में धमाकों के बाद एयरस्पेस बंद कर दिया गया और फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं।

  • बहरीन: मनामा स्थित अमेरिकी नौसेना (US Navy) के मुख्यालय पर मिसाइल गिरने की पुष्टि हुई है।

  • कुवैत और इराक: कुवैत के अल सलेम एयरबेस और इराक के जर्फ अल-सखार में हुए धमाकों में दो इराकी फाइटर्स की मौत हो गई।

ट्रंप और नेतन्याहू की रणनीति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले को अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान का मिसाइल प्रोग्राम पूरी दुनिया के लिए खतरा है और इसे जड़ से खत्म करना ही उनका मकसद है। वहीं इजरायल ने अपने देश में ‘इमरजेंसी’ लागू कर दी है। रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने स्कूलों और दफ्तरों को बंद करने का आदेश दिया है और अस्पतालों को अंडरग्राउंड शेल्टरों में शिफ्ट कर दिया गया है।

रूस, चीन और फ्रांस की प्रतिक्रिया

जहां रूस और चीन ने ईरान को ‘ब्लैंक सपोर्ट’ दिया है, वहीं फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने इसे वैश्विक शांति के लिए गंभीर खतरा बताते हुए तत्काल युद्ध रोकने की अपील की है। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे ‘गैर-जिम्मेदाराना कार्रवाई’ करार देते हुए कूटनीतिक समाधान की मांग की है। भारत में कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी लोगों को सैन्य ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी है।

यह जंग अब केवल दो देशों के बीच नहीं रही, बल्कि एक वैश्विक टकराव का रूप ले चुकी है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ना तय है।

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