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शहरी निकायों की वित्तीय सेहत सुधारने की पहल, शहरी जमीन और मकानों की रजिस्ट्री पर स्पष्ट होंगे नियम

झारखंड में नगरपालिका भूमि-भवन ट्रांसफर सरचार्ज नियमावली के गठन पर लगी मुहर

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रांची: झारखंड के शहरों में बुनियादी नागरिक सुविधाओं के विस्तार और नगर निकायों (Municipal Bodies) को वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत फैसला लिया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘झारखण्ड नगरपालिका भूमि/भवन स्थानान्तरण अधिभार नियमावली, 2026’ के गठन के प्रस्ताव को विधिवत मंजूरी दे दी गई।
इस नई नियमावली के गठन का मुख्य उद्देश्य नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों के क्षेत्राधिकार में आने वाली अचल संपत्तियों (जमीन और मकान) के हस्तांतरण पर लगने वाले अधिभार (Surcharge) की प्रक्रिया को पारदर्शी, व्यवस्थित और कानूनी रूप से सुदृढ़ बनाना है।

क्यों पड़ी नई नियमावली की जरूरत?

झारखंड म्यूनिसिपल एक्ट के तहत शहरी क्षेत्रों में जमीन या फ्लैट/मकान की रजिस्ट्री के दौरान स्टांप शुल्क और निबंधन फीस के अलावा एक निश्चित दर से नगर पालिका अधिभार (ट्रांसफर ड्यूटी/सरचार्ज) वसूला जाता रहा है। यह राशि सीधे तौर पर संबंधित नगर निकायों के खाते में अंतरित की जाती है, जिससे शहरों में सड़क, नाली, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे नागरिक विकास कार्य संचालित होते हैं।
हालांकि, पूर्व के नियमों में कई विसंगतियों और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव के कारण संग्रह और समायोजन में तकनीकी अड़चनें आती थीं। नई नियमावली, 2026 के लागू होने से निबंधन विभाग (Registration Department) और नगर विकास विभाग के बीच तालमेल बेहतर होगा। संपत्तियों के हस्तांतरण पर लगने वाले अधिभार का आकलन, संग्रह और निकायों को सीधे हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनेगी।

शहरी विकास योजनाओं को मिलेगा नया संबल

राज्य के प्रमुख शहरी निकायों—जैसे रांची नगर निगम, धनबाद, जमशेदपुर, देवघर और हजारीबाग—में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण नागरिक सुविधाओं का विस्तार एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। अधिकांश निकाय राजस्व की कमी से जूझते रहे हैं और बुनियादी विकास कार्यों के लिए राज्य सरकार के अनुदान पर निर्भर रहते हैं।
इस नियमावली से अधिभार का लीकेज रुकेगा और निकायों की आय में नियमित बढ़ोतरी होगी। इस राजस्व का सीधा उपयोग वार्ड स्तर पर साफ-सफाई, पार्कों के सौंदर्यीकरण, जल निकासी और बेहतर सड़कों के निर्माण में किया जा सकेगा।

रियल एस्टेट और आम नागरिकों पर प्रभाव

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस नियमावली का मकसद आम जनता पर नया वित्तीय बोझ डालना नहीं, बल्कि संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े मौजूदा शुल्कों के निर्धारण, गणना और संकलन में एकरूपता व पारदर्शिता लाना है। ऑनलाइन रजिस्ट्री सिस्टम के साथ इसका एकीकरण होने से संपत्ति खरीदारों को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त प्रशासनिक चक्कर या भ्रामक गणना से राहत मिलेगी। मंत्रिपरिषद की इस बैठक में राज्य के विकास से जुड़े कुल 62 प्रस्तावों पर स्वीकृति दी गई। यह फैसला शहरी सुशासन और सतत आधारभूत संरचना के निर्माण में एक दूरगामी कदम साबित होगा।
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