फॉण्ट कनवर्टर NEW

रूस की धरती पर उतरे भारतीय जवान, नाटो देशों में मची खलबली?

World News: रूस और भारत के रिश्ते दशकों से बेहद घनिष्ठ रहे हैं। लेकिन जब रूस की धरती पर भारतीय सैनिक सैन्य अभ्यास के लिए उतरें, तो नाटो देशों में हलचल मचना लाजमी है। दरअसल, रूस और बेलारूस द्वारा आयोजित किए जा रहे विशाल सैन्य

अपनी भाषा में पढ़ें

World News: रूस और भारत के रिश्ते दशकों से बेहद घनिष्ठ रहे हैं। लेकिन जब रूस की धरती पर भारतीय सैनिक सैन्य अभ्यास के लिए उतरें, तो नाटो देशों में हलचल मचना लाजमी है। दरअसल, रूस और बेलारूस द्वारा आयोजित किए जा रहे विशाल सैन्य अभ्यास ‘जापाद-2025’ में भारत भी शामिल हुआ है।

इस एक्सरसाइज में करीब 1 लाख सैनिक हिस्सा ले रहे हैं, जबकि शुरुआत में बेलारूस ने सिर्फ 7,000 सैनिकों के शामिल होने का दावा किया था। खास बात यह है कि भारत की ओर से कुमाऊं रेजिमेंट के 65 जवान रूस के निज़नी नोवगोरोद के पास मुलिनो ट्रेनिंग ग्राउंड पर मौजूद हैं। यहाँ भारतीय जवान रूसी सैनिकों के साथ मिलकर टैक्टिकल ड्रिल और हथियार संचालन की ट्रेनिंग कर रहे हैं।

इस अभ्यास का मकसद भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग और आपसी भरोसे को और मजबूत करना है। पहले ‘जापाद’ अभ्यास को केवल रूस और बेलारूस तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब इसमें भारत, ईरान, बांग्लादेश, बुर्किना फासो, कांगो और माली जैसे देश भी शामिल हो गए हैं। दिलचस्प यह है कि अमेरिका भी इस बार ऑब्जर्वर के तौर पर मौजूद रहा, हालांकि उसका प्रतिनिधिमंडल रूस नहीं बल्कि बेलारूस में गया।

पेंटागन ने पुष्टि की कि अमेरिकी रक्षा अटैची ने बेलारूस में आयोजित डिस्टिंग्विश्ड विजिटर डे में हिस्सा लिया। यहां अमेरिकी अधिकारियों ने बेलारूस के रक्षा मंत्री से मुलाकात की, जिसे रूस के करीबी इस देश के साथ अमेरिका की कूटनीतिक “वॉर्मिंग अप” के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बेलारूस को रूस से अलग करने या फिर उसके जरिए यूक्रेन युद्ध खत्म कराने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

भारत और रूस का रक्षा सहयोग नया नहीं है। भारत लंबे समय से रूस से हथियार खरीदता रहा है और यूक्रेन युद्ध के दौरान भी रूस से सस्ते दामों पर बड़े पैमाने पर तेल खरीदा। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कई बार भारत पर दबाव बनाने की कोशिश की कि वह रूस से दूरी बनाए, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एससीओ सम्मेलन में पुतिन और शी जिनपिंग दोनों से मुलाकात कर यह साफ कर दिया कि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता बरकरार रखेगा और पुराने दोस्त रूस के साथ साझेदारी जारी रखेगा।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram