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भारत पर युद्ध का साया: रसोई गैस बचाने के लिए सरकार का ‘मास्टर प्लान’, लागू हुआ एस्मा

नई दिल्ली — पश्चिम एशिया में छिड़ी भीषण जंग का सीधा असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है, जिससे भारत में गैस किल्लत की आशंका गहरा

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नई दिल्ली — पश्चिम एशिया में छिड़ी भीषण जंग का सीधा असर अब भारत की रसोई तक पहुंचने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मचा दिया है, जिससे भारत में गैस किल्लत की आशंका गहरा गई है। इस आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ESMA) और आवश्यक वस्तु अधिनियम के कड़े प्रावधान लागू कर दिए हैं।

रिफाइनरियों को सख्त आदेश: ‘सिर्फ रसोई गैस बनाओ’

सरकार ने देश की सभी तेल रिफाइनरियों और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे अपनी पूरी क्षमता का उपयोग एलपीजी (LPG) उत्पादन बढ़ाने में करें। एस्मा लागू होने के बाद अब इन इकाइयों में किसी भी तरह की हड़ताल या काम रोकने वाली गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लग गया है। निर्देशों के मुताबिक:

  • रिफाइनिंग क्षमता का अधिकतम उपयोग एलपीजी बनाने में होगा।

  • अन्य हाइड्रोकार्बन स्रोतों को भी एलपीजी पूल की ओर मोड़ने का आदेश दिया गया है।

  • उत्पादन और आपूर्ति के मानकों का पालन करना अब कानूनी रूप से अनिवार्य है।

किसे मिलेगी कितनी गैस? सरकार ने तय की प्राथमिकता

युद्ध के दुष्प्रभावों से आम जनता को बचाने के लिए सरकार ने गैस वितरण की एक नई ‘प्रायोरिटी लिस्ट’ तैयार की है:

प्राथमिकताक्षेत्रआपूर्ति का पैमाना
पहलीघरों की पाइप वाली गैस (PNG) और गाड़ियों की CNG100% आपूर्ति अनिवार्य
दूसरीउर्वरक (फर्टिलाइजर) संयंत्रपिछले 6 माह की औसत जरूरत का 70%
तीसरीकमर्शियल उपयोगजमाखोरी रोकने के लिए सख्त निगरानी

होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी ने बढ़ाई टेंशन

मध्य पूर्व में पिछले 11 दिनों से जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसा महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग लगभग बंद हो गया है। भारत के लिए यह खबर इसलिए डराने वाली है क्योंकि:

  1. भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का करीब 90% आयात सऊदी अरब जैसे देशों से करता है।

  2. यह पूरा आयात इसी समुद्री रास्ते (होर्मुज) पर निर्भर है।

  3. आयात बाधित होने से घरेलू स्तर पर एलपीजी की कमी का संकट खड़ा हो गया है।

सरकार का यह कदम विशेष रूप से कमर्शियल गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और संभावित जमाखोरी को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन कड़े फैसलों से देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी और आम नागरिकों को निर्बाध रसोई गैस मिलती रहेगी।

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