Jamshedpur news:  खासमहल स्थित टाटानगर रेलवे अस्पताल में इलाज के दौरान परसुडीह के हलुदबनी निवासी 70 वर्षीय गुलफूल देवी की देर रात मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार के सदस्य और आसपास के लोग अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। परिजनों का कहना है कि वृद्धा अपने पैरों से चलकर अस्पताल पहुंची थीं, ऐसे में अचानक उनकी मौत कैसे हो गई, इसका जवाब अस्पताल प्रबंधन को देना चाहिए। परिवार के लोग यह भी जानना चाहते हैं कि उन्हें किस प्रकार की दवा दी गई थी, जिससे उनकी मौत हो गई।

मृतका के बेटे राजेश प्रसाद उर्फ पोंगा ने बताया कि 3 मार्च की सुबह करीब 11 बजे उनकी मां को सर्दी, खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत होने पर टाटानगर रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद डॉक्टरों ने कहा था कि स्थिति सामान्य है। इस पर परिजनों ने उन्हें छुट्टी देने की बात कही, लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि अगले दिन ब्लड रिपोर्ट आने के बाद छुट्टी दे दी जाएगी। राजेश के अनुसार बुधवार रात करीब 8.30 बजे तक उनकी मां से मोबाइल पर बातचीत हुई थी और उस समय उनकी तबीयत ठीक लग रही थी।

परिजनों का आरोप है कि गुलफूल देवी की मौत की सूचना भी अस्पताल की ओर से परिवार को नहीं दी गई। जब राजेश अस्पताल पहुंचे तब तक उनकी मां की मौत हो चुकी थी। इसके बाद जब परिवार के अन्य सदस्य और बस्ती के लोग अस्पताल पहुंचे तो नर्स और अस्पताल कर्मियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। इसको लेकर भी लोगों में आक्रोश है और वे इसका कारण जानना चाहते हैं।

घटना के बाद परसुडीह थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ही वृद्धा की मौत हुई है। उनका कहना है कि घटना के समय अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था और गुलफूल देवी को नर्सों ने चारों ओर से घेर रखा था। परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

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