Washington, USA: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में अब एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है, जो तकनीक और इंसानों के बीच की दूरियों को लगभग खत्म कर देगा। अब तक एआई सिर्फ लिखे गए शब्दों या रोबोटिक आवाज़ के जरिए जवाब देता था, लेकिन अब वैज्ञानिक ऐसे सिस्टम तैयार कर रहे हैं जो इंसानों की तरह देख सकें, सुन सकें और चेहरे के भावों के साथ आमने-सामने की बातचीत कर सकें। इसी कड़ी में एआई कंपनी ‘टेवस’ (Tevas) ने ‘ग्रिफिन’ (Griffin) नाम का एक नया और एडवांस मॉडल दुनिया के सामने पेश किया है।
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पारंपरिक चैटबॉट से कितना अलग है ग्रिफिन?
आम तौर पर जो एआई चैटबॉट हम इस्तेमाल करते हैं, उनकी कार्यप्रणाली लंबी होती है- पहले यूजर की आवाज को टेक्स्ट में बदला जाता है, फिर लैंग्वेज मॉडल उसका जवाब तैयार करता है, और अंत में दूसरा सिस्टम उस टेक्स्ट को आवाज या वीडियो में बदलता है। लेकिन ग्रिफिन इन सारी जटिल प्रक्रियाओं को पीछे छोड़ते हुए एक ही ‘फुल-डुप्लेक्स वीडियो-टू-वीडियो सिस्टम’ पर काम करता है।
कंपनी के मुताबिक, लाइव वीडियो कॉल के दौरान ग्रिफिन यूजर को एक साथ देख भी सकता है और सुन भी सकता है, और उसी के आधार पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है। बातचीत करते समय यह इंसानों की तरह सिर हिलाने या अपने चेहरे पर हल्के भाव लाने जैसे काम भी कर सकता है। सबसे बड़ी खूबी यह है कि वीडियो कॉल के दौरान स्क्रीन पर या सामने दिखने वाली किसी वस्तु या गतिविधि को भी यह तुरंत समझकर अपने जवाब में शामिल कर सकता है, जिससे पूरी बातचीत किसी रोबोट से नहीं बल्कि किसी जीवित इंसान से होने का अहसास कराती है।
परीक्षण में सामने आए हैरान करने वाले नतीजे
अपनी इस तकनीक की क्षमता को परखने के लिए ‘टेवस’ ने ग्रिफिन का एक छोटा परीक्षण (Griffin-Lite) कराया। इसमें 54 प्रतिभागियों को शामिल किया गया, जिनमें से 26 लोगों (यानी करीब 48 प्रतिशत) का कहना था कि सिर्फ एक मिनट की बातचीत के बाद उन्हें ऐसा लगा मानो वे किसी असली इंसान से बात कर रहे हैं। कंपनी के पुराने सिस्टम के परीक्षण में 41 में से केवल एक व्यक्ति को ऐसा अनुभव हुआ था।
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हालांकि, जानकारों का मानना है कि यह परीक्षण बहुत छोटा और सीमित समय के लिए था, इसलिए लंबे समय की बातचीत में यह कितना सटीक और इंसानी व्यवहार कर पाता है, इसका आकलन अभी किया जाना बाकी है। इसके अलावा, बेंचमार्क परीक्षणों में भी ग्रिफिन-लाइट ने शानदार प्रदर्शन किया है। एनवीडिया के वीडियोएफडीबी ट्रैक में इसे 5 में से 3.83 अंक मिले, जबकि इंसानी रिकॉर्डिंग का स्कोर 3.92 था। वहीं, परसेप्शन ट्रैक में इसे 3.73 अंक मिले, जबकि इंसानी प्रदर्शन 4.20 दर्ज किया गया।
भविष्य में कहां होगा इसका इस्तेमाल?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के एडवांस विजुअल एआई मॉडल आने वाले समय में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में तहलका मचा सकते हैं। ग्रिफिन जैसी तकनीक का उपयोग भविष्य में एक बेहतरीन एआई ट्यूटर (AI Tutor) के रूप में, ऑनलाइन वर्चुअल सहायता देने के लिए, और खासकर अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए एक संवेदी और संवादी साथी के रूप में किया जा सकता है। तकनीक की यह छलांग यह साबित करती है कि आने वाले कल में मशीनें सिर्फ काम ही नहीं करेंगी, बल्कि इंसानों की भावनाओं और तौर-तरीकों को पूरी गहराई से समझ भी सकेंगी।
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