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दादी-नानी का ‘खतरनाक’ शौक! नाथुला दर्रे पर बाइक से लहराया तिरंगा

Interesting News: कहते हैं कि अगर इंसान के इरादे फौलादी हों, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है दो बुजुर्ग महिला बाइकर्स ने, जिन्होंने इस उम्र में आराम करने के बजाय एडवेंचर का वो रास्ता चुना, जहां जवान भी

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Interesting News: कहते हैं कि अगर इंसान के इरादे फौलादी हों, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है दो बुजुर्ग महिला बाइकर्स ने, जिन्होंने इस उम्र में आराम करने के बजाय एडवेंचर का वो रास्ता चुना, जहां जवान भी जाने से कतराते हैं। बर्फ, कम ऑक्सीजन और हड्डियों को गला देने वाली ठंड के बीच इन महिलाओं ने भारत-चीन सीमा पर स्थित दुनिया के सबसे ऊंचे और कठिन रास्तों में से एक ‘नाथुला दर्रे’ तक की यात्रा बाइक से पूरी की है। सोशल मीडिया पर इनका वीडियो वायरल होते ही लोग इनकी तारीफों के पुल बांध रहे हैं।

बेंगलुरु से भूटान तक का सफर: माँ-बेटी की जोड़ी ने रचा इतिहास

इस अनोखी यात्रा की शुरुआत कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से हुई थी। पांच महिला बाइकर्स के इस ग्रुप में सीमा चेची और उनकी बुजुर्ग मां आकर्षण का मुख्य केंद्र रहीं। यह सफर कोई आम रोड ट्रिप नहीं था; सिक्किम के दुर्गम रास्तों से होते हुए यह दल नेपाल और भूटान तक पहुँचा। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस उम्र में लोग जोड़ों के दर्द और बीमारियों की शिकायत करते हैं, उस उम्र में इन बुजुर्ग महिलाओं ने भारी-भरकम बाइक को पहाड़ों के घुमावदार मोड़ों पर सफलतापूर्वक दौड़ाया।

तेज ठंड और ऑक्सीजन की कमी; पर हौसला नहीं पड़ा कम

नाथुला दर्रा समुद्र तल से करीब 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है। यहां हवा काफी पतली होती है और शारीरिक थकान के साथ मानसिक दबाव भी बढ़ जाता है। सफर के दौरान इस जांबाज टीम (सीमा चेची, उनकी माँ, स्वप्ना, अनीता और शेषा) को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। कभी बर्फीली हवाओं ने रास्ता रोका, तो कभी चढ़ाई ने हिम्मत परखी। लेकिन जब ये महिलाएं नाथुला पहुँची और वहां तिरंगा लहराया, तो उनकी आँखों में गर्व के आंसू थे। उन्होंने साबित कर दिया कि सपने देखने और उन्हें पूरा करने की कोई समय सीमा नहीं होती।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो; महिलाओं के लिए बनीं मिसाल

इंस्टाग्राम पर इस यात्रा का वीडियो शेयर होते ही यह ‘प्रेरणा का प्रतीक’ बन गया है। हजारों यूजर्स ने कमेंट कर लिखा कि “यह असली नारी शक्ति है।” इस ग्रुप ने संदेश दिया है कि महिलाएं निस्वार्थ, साहसी और मजबूत इच्छाशक्ति वाली होती हैं। यह अभियान न केवल एक एडवेंचर ट्रिप था, बल्कि उन सभी लोगों के लिए एक करारा जवाब था जो बढ़ती उम्र को सपनों की रुकावट मानते हैं। आज इन बुजुर्ग महिला राइडर्स की कहानी हर उस शख्स के लिए प्रेरणा है जो जीवन में कुछ नया करने का साहस जुटाना चाहता है।

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