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VBU दीक्षांत समारोह: राज्यपाल की छात्रों को सीख, ‘डिग्री नहीं कर्म से बनेगी पहचान’

हजारीबाग: हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) का परिसर आज उत्सव के रंग में डूबा नजर आया। अवसर था विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह का, जहां मेधावी विद्यार्थियों के चेहरों पर परिश्रम की सफलता की चमक साफ देखी जा सकती थी। इस गरिमामय समारोह में

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हजारीबाग: हजारीबाग स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय (VBU) का परिसर आज उत्सव के रंग में डूबा नजर आया। अवसर था विश्वविद्यालय के 10वें दीक्षांत समारोह का, जहां मेधावी विद्यार्थियों के चेहरों पर परिश्रम की सफलता की चमक साफ देखी जा सकती थी। इस गरिमामय समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए झारखंड के राज्यपाल-सह-कुलाधिपति श्री संतोष कुमार गंगवार ने युवा शोधार्थियों और विद्यार्थियों को जीवन के नए सफर के लिए शुभकामनाएं दीं। समारोह की शुरुआत राज्यपाल द्वारा भू-दान आंदोलन के प्रणेता संत विनोबा भावे की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई।

डिग्री केवल कागज नहीं, संस्कारों का प्रतीक है: राज्यपाल

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्रदान करने का औपचारिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों के वर्षों के परिश्रम, अनुशासन और धैर्य का प्रतीक है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “आज आपके जीवन के एक महत्वपूर्ण अध्याय की पूर्णता हुई है, लेकिन यहीं से एक नए और बड़े अध्याय की शुरुआत भी हो रही है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय से प्राप्त ज्ञान और संस्कारों का उपयोग अब समाज और राष्ट्र के व्यापक हित में करना हर विद्यार्थी का परम दायित्व है।

अशिक्षा मिटाने का ‘गंगवार मंत्र’: हर शिक्षित युवा ले एक बच्चे की जिम्मेदारी

राज्यपाल ने सामाजिक सरोकारों पर बात करते हुए एक बहुत ही मार्मिक और महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि देश का प्रत्येक शिक्षित युवा समाज के किसी एक गरीब या वंचित बच्चे की शिक्षा की जिम्मेदारी उठा ले, तो भारत से अशिक्षा का अंधकार स्वतः समाप्त हो जाएगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को भी नसीहत दी कि संस्थान केवल डिग्री बांटने के केंद्र न बनें, बल्कि विचार और चरित्र निर्माण के केंद्र हों। उन्होंने छात्रहित में ‘प्लेसमेंट सेंटर’ को और अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता पर बल दिया ताकि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।

विकसित भारत @2047: आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत @2047’ के विजन का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने युवाओं से ईमानदारी और नैतिकता के साथ राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ की सराहना करते हुए कहा कि यह नीति नई पीढ़ी को केवल अवसर ही नहीं देती, बल्कि उन्हें अपनी जिम्मेदारियों का बोध भी कराती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, “सफलता और असफलता जीवन के दो पहलू हैं, लेकिन असली विजेता वही है जो असफलता से सीखकर आगे बढ़ता है।”

समारोह के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य के पथ पर चलने की शपथ दिलाई और आशा व्यक्त की कि वे जहां भी रहेंगे, अपने आचरण और सेवा-भाव से विनोबा भावे विश्वविद्यालय और अपने परिवार का नाम रोशन करेंगे।

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