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लाइटिंग से लेकर कैमरा एंगल तक… चाईबासा की कार्यशाला में फोटोग्राफरों ने सीखे नए हुनर

Chaibasa News: चाईबासा में मंगलवार को फोटोग्राफी और सिनेमाटोग्राफी की कला को निखारने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वेस्ट सिंहभूम फोटोग्राफर एसोसिएशन के तत्वावधान में सेंट मेरी ऑडिटोरियम हॉल में हुआ। खास बात यह रही कि इस कार्यशाला

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Chaibasa News: चाईबासा में मंगलवार को फोटोग्राफी और सिनेमाटोग्राफी की कला को निखारने के उद्देश्य से एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम वेस्ट सिंहभूम फोटोग्राफर एसोसिएशन के तत्वावधान में सेंट मेरी ऑडिटोरियम हॉल में हुआ। खास बात यह रही कि इस कार्यशाला का सहयोग फुजीफिल्म इंडिया कंपनी ने किया।

इस कार्यशाला में जिलेभर से आए फोटोग्राफरों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। वर्कशॉप के मुख्य वक्ता ईस्टर्न इंडिया के प्रसिद्ध सिनेमैटोग्राफर और कैमरा विशेषज्ञ अरित्रा दास रहे। उन्होंने फोटोग्राफी के मूल तत्वों पर विस्तार से चर्चा की। अरित्रा दास ने कैमरा संचालन, एक्सपोज़र, अपर्चर, शटर स्पीड, डायनामिक रेंज और कम्पोजिशन जैसे महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी साझा की।

उन्होंने यह भी समझाया कि फोटोग्राफी का असली केंद्र सब्जेक्ट होता है, जबकि एक्सपोज़र, लाइटिंग और डिटेलिंग जैसे पहलू इसके बाद आते हैं। लाइव डेमो के दौरान उन्होंने एक महिला मॉडल के साथ शूटिंग प्रैक्टिकल कराया, जिसमें फोटोग्राफरों को सही लाइटिंग सेटअप और कैमरा सेटिंग्स को समझने का मौका मिला।

कार्यशाला में फुजीफिल्म कैमरों के नए फीचर्स और उनके उपयोग पर भी चर्चा हुई। फोटोग्राफरों ने बताया कि इस तरह के आयोजन से न केवल उन्हें तकनीकी जानकारी मिलती है, बल्कि आधुनिक ट्रेंड्स और डिजिटल टूल्स को समझने में भी आसानी होती है।

एसोसिएशन के सचिव संजय कुमार मुखी ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं जिले के फोटोग्राफरों के लिए काफी लाभकारी हैं। इनका उद्देश्य सभी फोटोग्राफरों को एक मंच पर लाकर उनके कौशल को और निखारना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं। रील्स और सोशल मीडिया की बढ़ती लोकप्रियता ने इसकी मांग को और बढ़ा दिया है।

इस सफल आयोजन में एसोसिएशन के अध्यक्ष करुणा करन उदयान, सचिव संजय कुमार मुखी, शादाब आलम, शेख तबरेज, तरुण दास, जय कुमार, दिलीप महतो, ज्ञानचंद प्रजापति, रोहित मुंडा, मनीष बंडिया और सुदर्शन तामसाय का विशेष योगदान रहा।

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