Jamshedpur news: झारखंड में गंडा समाज को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने की मांग को लेकर समाज के लोगों ने शुक्रवार को पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्षों से लंबित इस मांग पर अब सरकार को ठोस निर्णय लेना चाहिए, ताकि समुदाय को संवैधानिक अधिकार और आरक्षण का लाभ मिल सके।

राज क्लब गंडा समाज के अध्यक्ष नरेश कुमार टांडिया ने बताया कि झारखंड के विभिन्न जिलों में गंडा समाज के लगभग डेढ़ लाख लोग निवास करते हैं। समाज के लोग लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन का सामना कर रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं किया गया है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गंडा जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, लेकिन झारखंड में समान परिस्थितियों के बावजूद इस समुदाय को यह सुविधा नहीं मिल रही है। इससे समाज के युवाओं और विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, आरक्षण और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि राज्य गठन के समय उन्हें उम्मीद थी कि अलग झारखंड बनने के बाद उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी, लेकिन 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। उन्होंने सरकार से गंडा समाज को जल्द से जल्द अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की।

समाज के लोगों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

ज्ञापन सौंपने के दौरान नरेश कुमार टांडिया, फूलचंद राय, धर्मेंद्र दीप, हिरण बीथ, कृपा नाग, मोतीलाल करन, सुमित्रा सागर, शंकर टांडिया, रेखा महानंद, सागर सोना, सोनू सोना, मनोज नाग, बलराम टांडी, कार्तिक दीप, अरुण दीप, लक्ष्मी महानंद, गोरेश नाग, रेखो हर्षपाल, प्रिया नाग, अंजलि छत्तर, मदन कुमार, नवीन कुमार, हेमंत विश्वाल, सन्नी टांडी, दिलीप कुमार सुना, श्याम बारिक, आनंद नाग और गणेश नाग समेत बड़ी संख्या में समाज के महिला एवं पुरुष सदस्य उपस्थित थे।

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