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हर 10 में से 1 महिला को है ये खतरनाक बीमारी, जिसे हम समझते हैं ‘मामूली दर्द’

Health News: दुनिया भर में लगभग 19 करोड़ महिलाएं एक ऐसी शारीरिक स्थिति से जूझ रही हैं, जिसे अक्सर समाज और स्वयं महिलाएं ‘मामूली दर्द’ मानकर सहन कर लेती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रजनन आयु की हर 10 में

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Health News: दुनिया भर में लगभग 19 करोड़ महिलाएं एक ऐसी शारीरिक स्थिति से जूझ रही हैं, जिसे अक्सर समाज और स्वयं महिलाएं ‘मामूली दर्द’ मानकर सहन कर लेती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रजनन आयु की हर 10 में से 1 महिला एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित है। यह स्थिति न केवल असहनीय दर्द देती है, बल्कि समय पर इलाज न मिलने पर बांझपन (Infertility) का कारण भी बन सकती है।

क्या है एंडोमेट्रियोसिस?

इस बीमारी में गर्भाशय के अंदर पाए जाने वाले टिश्यू (ऊतक) गर्भाशय के बाहर शरीर के अन्य अंगों जैसे अंडाशय, आंत, डायफ्राम या यहां तक कि फेफड़ों पर बढ़ने लगते हैं। मासिक धर्म के दौरान ये टिश्यू टूटते हैं, लेकिन शरीर से बाहर नहीं निकल पाते, जिससे अंदरूनी सूजन और स्कार टिश्यू बन जाते हैं।

पहचानें ये अनोखे लक्षण (सिरदर्द से लेकर कंधे के दर्द तक): विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बीमारी केवल पेट दर्द तक सीमित नहीं है। शरीर इन संकेतों से भी चेतावनी देता है:

  • कंधे में दर्द: यदि पीरियड के दौरान कंधे में तेज दर्द हो, तो यह डायफ्राम या फेफड़ों के पास टिश्यू जमा होने का संकेत हो सकता है।

  • पाचन संबंधी समस्या: कब्ज, दस्त या पेट फूलने को अक्सर खराब पाचन समझ लिया जाता है, लेकिन यह एंडोमेट्रियोसिस हो सकता है।

  • यूरिन में दिक्कत: बार-बार पेशाब आना या जलन महसूस होना, जिसे अक्सर यूटीआई (UTI) मान लिया जाता है।

  • पैरों में दर्द: कूल्हे से लेकर घुटने तक फैलने वाला दर्द, जो नसों पर दबाव के कारण होता है।

  • क्रोनिक थकान और माइग्रेन: शरीर में भारीपन और हार्मोनल बदलाव के कारण होने वाला तेज सिरदर्द।

इलाज और बचाव

हालांकि एंडोमेट्रियोसिस का कोई स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन शुरुआती पहचान से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। हार्मोनल थेरेपी और दर्द निवारक दवाओं के अलावा गंभीर मामलों में सर्जरी का सहारा लिया जाता है।

जीवनशैली में बदलाव है जरूरी: संतुलित आहार, नियमित योग और व्यायाम शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पीरियड का दर्द आपकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो उसे चुपचाप सहने के बजाय तुरंत स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से सलाह लें।

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