रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने एक बार फिर आम जनता, किसानों और युवाओं से जुड़े जमीनी मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने हरमू स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता के दौरान यह बात कही। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि देश का समग्र आर्थिक विकास तब तक संभव नहीं है, जब तक कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश के अन्नदाता को मजबूत नहीं किया जाता।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सुप्रियो भट्टाचार्य ने देश के कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज भी देश के किसान अनेक बुनियादी चुनौतियों और अनिश्चितताओं का सामना कर रहे हैं। किसानों की आय में वृद्धि करना, ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार पैदा करना और कृषि आधारित कुटीर व लघु उद्योगों को बढ़ावा देना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि दिल्ली की नीतियां जमीन से कटी हुई हैं, जिसके कारण मजदूरों और किसानों की समस्याएं दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही हैं।
किसानों के साथ-साथ सुप्रियो भट्टाचार्य ने राज्य और देश के युवाओं का मुद्दा भी बेहद प्रमुखता से उठाया। प्रतियोगी परीक्षाओं में आ रही विसंगतियों की ओर इशारा करते हुए झामुमो नेता ने मांग की कि देश की परीक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और विश्वसनीय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार के पर्याप्त अवसर और एक निष्पक्ष माहौल नहीं मिलेगा, तब तक देश की तरक्की की बातें बेमानी हैं। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली व्यवस्था में आमूलचूल संस्थागत पारदर्शिता लाने की सख्त जरूरत है।
झामुमो महासचिव ने सामाजिक न्याय और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा को लोकतांत्रिक व्यवस्था की मुख्य रीढ़ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि झामुमो हमेशा से ही जल, जंगल, जमीन और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करती रही है। सरकार को ऐसी जन-हितैषी नीतियां बनानी चाहिए, जो कागजों से निकलकर सीधे ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, ताकि संतुलित विकास का सपना सच हो सके। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रियो भट्टाचार्य के साथ पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रबुद्ध नेता और समर्पित कार्यकर्ता भी उपस्थित थे, जिन्होंने पार्टी के इस रुख का पुरजोर समर्थन किया।




