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डोंगा घाट हादसा: 48 घंटे बाद मिला अंकुश का शव, प्रशासन पर फूटा गुस्सा

Jamshedpur news: सिदगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत बारीडीह स्थित स्वर्णरेखा नदी के डोंगा घाट से 26 जनवरी को सामने आई 11 वर्षीय अंकुश कालिंदी की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बिरसानगर निवासी अंकुश दोपहर करीब दो बजे नदी में नहाने के

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Jamshedpur news: सिदगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत बारीडीह स्थित स्वर्णरेखा नदी के डोंगा घाट से 26 जनवरी को सामने आई 11 वर्षीय अंकुश कालिंदी की दर्दनाक मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। बिरसानगर निवासी अंकुश दोपहर करीब दो बजे नदी में नहाने के दौरान डूब गया था। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, लेकिन प्रभावी खोज-बचाव अभियान शुरू न हो पाने के कारण बच्चे का शव करीब 48 घंटे बाद बुधवार को उसी डोंगा घाट से बरामद किया जा सका।

घटना के बाद शुरुआती लगभग 28 घंटे तक ठोस कार्रवाई न होने का आरोप स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लगाया है। पहले दिन क्षेत्र की विधायक पूर्णिमा साहू मौके पर पहुंचीं और परिजनों व ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि रांची से एनडीआरएफ की टीम भेजी जा रही है, लेकिन पूरे दिन और शाम तक कोई टीम नहीं पहुंची। परिजनों द्वारा दोबारा संपर्क किए जाने पर विधायक द्वारा इसे प्रशासनिक विषय बताने की बात भी सामने आई, जिससे लोगों में नाराजगी और बढ़ गई।

दूसरे दिन विधायक एक बार फिर घटनास्थल पहुंचीं और शोकाकुल परिजनों को सांत्वना दी। उसी दिन सुबह रांची से एनडीआरएफ की टीम जमशेदपुर पहुंची। टीम ने डोंगा घाट क्षेत्र में करीब तीन से चार घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद आखिरकार अंकुश कालिंदी का शव बरामद किया गया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना के दिन प्रशासन की मौजूदगी केवल औपचारिकता तक सीमित रही। जेएनएसी के गोताखोरों को स्थानीय लोगों की मदद से बुलाया गया, लेकिन संसाधनों और समुचित व्यवस्था के अभाव में खोज अभियान सफल नहीं हो सका। आधुनिक उपकरणों और प्रशिक्षित टीम की कमी के कारण कीमती समय नष्ट हुआ, जिसका खामियाजा एक मासूम को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।

इस घटना को लेकर इलाके में शोक के साथ-साथ आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों और स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि यदि यह हादसा किसी वीआईपी या मंत्री के बच्चे के साथ हुआ होता तो क्या प्रशासन की प्रतिक्रिया इतनी सुस्त होती। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं में बिना देरी के एनडीआरएफ या एसडीआरएफ की टीमों को मौके पर भेजा जाए और त्वरित व प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी और परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े।

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