Chatra news: इटखोरी प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र रजवार की सहायिका लीला सिन्हा का मामला लगातार लंबा खिंचता जा रहा है। कई महीनों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठी सहायिका आज भी अंतिम प्रशासनिक निर्णय का इंतजार कर रही हैं। जनता दरबार में आवेदन, विभिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में लगातार प्रकाशित खबरें और जिला प्रशासन के संज्ञान के बाद भी मामला अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।

*उपायुक्त ने दिया था कार्रवाई का भरोसा*

बीते कुछ सप्ताह पूर्व उपायुक्त रवि आनंद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है और जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

*बीडीओ ने की जांच, केंद्र में काम करने की सलाह*

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपायुक्त के निर्देश पर इटखोरी बीडीओ ने दस्तावेजों की जांच की। पीड़िता का कहना है कि जांच के दौरान उन्हें अपने आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर नियमित रूप से कार्य करने को कहा गया। इसके बाद से वह लगातार केंद्र पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

*कार्य कर रहीं, लेकिन हाजिरी अब भी नहीं*

लीला सिन्हा का कहना है कि वह प्रतिदिन केंद्र में उपस्थित होकर कार्य कर रही हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि उन्हें बताया जाता है कि सीडीपीओ एवं पर्यवेक्षिका कार्यालय से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

*डीडीसी का बयान भी आया सामने*

मंगलवार शाम उप विकास आयुक्त (डीडीसी) से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपना प्रभार सौंप दिया है और मामले में आगे नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं उपायुक्त से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

*पीड़िता की मांग—दोषी हूं तो लिखित आदेश दें, सही हूं तो न्याय दें*

भावुक होकर लीला सिन्हा ने कहा कि यदि वह नियमों के अनुसार सेवा में नहीं हैं तो प्रशासन स्पष्ट लिखित आदेश जारी करे। लेकिन यदि उनके दस्तावेज सही हैं तो उन्हें तत्काल नियमित रूप से कार्य करने दिया जाए, रोकी गई उपस्थिति का समाधान किया जाए तथा जिन महीनों तक उन्हें कार्य से दूर रखा गया, उस अवधि के मानदेय पर भी नियमानुसार निर्णय लिया जाए।

*लोगों के बीच उठ रहे हैं कई सवाल*

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि जांच जारी है तो उसे समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लंबित मामलों पर शीघ्र निर्णय प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करता है।

लगातार सबकी निगाहें अंतिम निर्णय पर

लगातार प्रकाशित हो रही खबरों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई के बावजूद अंतिम आदेश अब तक सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे जिले की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि जांच कब पूरी होगी, आदेश कब जारी होगा और महीनों से न्याय की प्रतीक्षा कर रही सहायिका लीला सिन्हा को आखिर कब राहत मिलेगी।

महीनों से न्याय का इंतजार, जांच पर अब भी विराम; आखिर कब मिलेगा सहायिका लीला सिन्हा को इंसाफ?

उपायुक्त के निर्देश, बीडीओ की जांच और डीडीसी की समीक्षा के बाद भी फैसला लंबित; ड्यूटी कर रही सहायिका की हाजिरी नहीं, समयबद्ध कार्रवाई की मांग तेज

चतरा : इटखोरी प्रखंड के आंगनबाड़ी केंद्र रजवार की सहायिका लीला सिन्हा का मामला लगातार लंबा खिंचता जा रहा है। कई महीनों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठी सहायिका आज भी अंतिम प्रशासनिक निर्णय का इंतजार कर रही हैं। जनता दरबार में आवेदन, विभिन्न प्रमुख समाचार पत्रों में लगातार प्रकाशित खबरें और जिला प्रशासन के संज्ञान के बाद भी मामला अभी तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सका है।

*उपायुक्त ने दिया था कार्रवाई का भरोसा*

बीते कुछ सप्ताह पूर्व उपायुक्त रवि आनंद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि मामला उनके संज्ञान में है और जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

*बीडीओ ने की जांच, केंद्र में काम करने की सलाह*

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उपायुक्त के निर्देश पर इटखोरी बीडीओ ने दस्तावेजों की जांच की। पीड़िता का कहना है कि जांच के दौरान उन्हें अपने आंगनबाड़ी केंद्र में जाकर नियमित रूप से कार्य करने को कहा गया। इसके बाद से वह लगातार केंद्र पहुंचकर अपनी जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

*कार्य कर रहीं, लेकिन हाजिरी अब भी नहीं*

लीला सिन्हा का कहना है कि वह प्रतिदिन केंद्र में उपस्थित होकर कार्य कर रही हैं, लेकिन उनकी उपस्थिति दर्ज नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि उन्हें बताया जाता है कि सीडीपीओ एवं पर्यवेक्षिका कार्यालय से कोई आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।

*डीडीसी का बयान भी आया सामने*

मंगलवार शाम उप विकास आयुक्त (डीडीसी) से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि जांच अभी पूरी नहीं हो सकी है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपना प्रभार सौंप दिया है और मामले में आगे नियमानुसार कार्रवाई होगी। वहीं उपायुक्त से संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बातचीत नहीं हो सकी।

*पीड़िता की मांग—दोषी हूं तो लिखित आदेश दें, सही हूं तो न्याय दें*

भावुक होकर लीला सिन्हा ने कहा कि यदि वह नियमों के अनुसार सेवा में नहीं हैं तो प्रशासन स्पष्ट लिखित आदेश जारी करे। लेकिन यदि उनके दस्तावेज सही हैं तो उन्हें तत्काल नियमित रूप से कार्य करने दिया जाए, रोकी गई उपस्थिति का समाधान किया जाए तथा जिन महीनों तक उन्हें कार्य से दूर रखा गया, उस अवधि के मानदेय पर भी नियमानुसार निर्णय लिया जाए।

*लोगों के बीच उठ रहे हैं कई सवाल*

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि जांच जारी है तो उसे समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि लंबित मामलों पर शीघ्र निर्णय प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करता है।

लगातार सबकी निगाहें अंतिम निर्णय पर

लगातार प्रकाशित हो रही खबरों और प्रशासनिक स्तर पर हुई कार्रवाई के बावजूद अंतिम आदेश अब तक सामने नहीं आया है। ऐसे में पूरे जिले की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि जांच कब पूरी होगी, आदेश कब जारी होगा और महीनों से न्याय की प्रतीक्षा कर रही सहायिका लीला सिन्हा को आखिर कब राहत मिलेगी।

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