Close Menu
Public AddaPublic Adda
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • यूपी
  • राजनीति
  • स्पोर्ट्स
  • सोशल
  • अन्य
Facebook X (Twitter) Instagram
Public AddaPublic Adda

  • Home
  • India
  • World
  • States
    • Jharkhand
    • Bihar
    • Uttar Pradesh
  • Politics
  • Sports
  • Social/Interesting
  • More Adda
Public AddaPublic Adda
  • होम
  • देश
  • दुनिया
  • झारखंड
  • बिहार
  • यूपी
  • राजनीति
  • स्पोर्ट्स
  • सोशल
  • अन्य
Home»#Trending»झारखंड में लेक्चरर नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े सुधार की मांग तेज, JET परीक्षा उम्मीद की नई किरण
#Trending

झारखंड में लेक्चरर नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े सुधार की मांग तेज, JET परीक्षा उम्मीद की नई किरण

उच्च शिक्षा संकट : लेक्चरर नियुक्ति नियमावली व API प्रणाली में बदलाव की वकालत, जुटान अध्यक्ष प्रो. लोहरा का वक्तव्य
By Muzaffar HussainNovember 15, 20254 Mins Read
Facebook Twitter WhatsApp Threads Telegram
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email Telegram WhatsApp Threads Copy Link

अपनी भाषा चुनेें :

बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...

Ranchi : झारखंड में उच्च शिक्षा प्रणाली इन दिनों शिक्षकों की भारी कमी और धीमी नियुक्ति प्रक्रिया से जूझ रही है। झारखंड यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (जुटान) के अध्यक्ष प्रो. जगदीश लोहरा ने राज्य की मौजूदा लेक्चरर नियुक्ति नियमावली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि राज्य की शिक्षा व्यवस्था पिछले 25 वर्षों में जिस तरह पिछड़ी है, वह गहरी समीक्षा की मांग करती है।

25 वर्षों में सिर्फ 1700 लेक्चरर नियुक्त, भारी कमी आज भी बरकरार

झारखंड गठन के समय राज्य में केवल तीन विश्वविद्यालय थे। आज इनकी संख्या आठ तक पहुंच चुकी है, लेकिन नियुक्तियों की गति बेहद धीमी रही है। वर्ष 2008 में लगभग 750 और 2018 में 950 लेक्चरर की नियुक्ति अवश्य हुई, लेकिन कुल 1700 पदों पर बहाली राज्य की जरूरतों के मुकाबले बेहद कम है। विश्वविद्यालय और कॉलेजों में हजारों पद अब भी रिक्त पड़े हैं, जिसका सीधा असर शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध कार्य और छात्रों के विकास पर पड़ रहा है।
प्रो. लोहरा के अनुसार, “शिक्षक–छात्र अनुपात का असंतुलन राज्य के भविष्य के लिए खतरे की घंटी जैसा है। उच्च शिक्षा में गुणात्मक सुधार तभी संभव है जब पर्याप्त संख्या में योग्य शिक्षक नियुक्त हों।”

JET युवाओं के लिए नई उम्मीद, जनवरी 2026 में प्रस्तावित परीक्षा

झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा (JET) की घोषणा निश्चित रूप से एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। राज्य में लगभग 2500 शिक्षकों की नियुक्ति प्रस्तावित है, जिसके लिए युवाओं ने भारी उत्साह दिखाया है। विश्वविद्यालयों में प्रमाणपत्र लेने की होड़ और आवेदन तिथि बढ़ाने की मांग इसका उदाहरण है। प्रो. लोहरा का मानना है कि यदि JET परीक्षा पारदर्शी और आधुनिक मॉडल पर आधारित होगी, तो राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों की बहाली का मार्ग प्रशस्त होगा।

राजस्थान, एमपी, हरियाणा मॉडल से सीखने की जरूरत

देश के कई राज्यों—राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, मद्रास विश्वविद्यालय सेवा आयोग और तेलंगाना विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने सहायक प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया में उल्लेखनीय बदलाव किए हैं। इन राज्यों में सभी पात्र उम्मीदवारों को लिखित परीक्षा देने का समान अवसर मिलता है, जिससे प्रक्रिया पारदर्शी बनती है और किसी भी तरह के हेरफेर की संभावना कम हो जाती है।

लिखित परीक्षा के बाद रिक्त पदों के पांच गुणा अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है और 24 घंटे के भीतर परिणाम प्रकाशित कर दिया जाता है। प्रो. लोहरा का स्पष्ट मत है कि “झारखंड को यह मॉडल तुरंत अपनाना चाहिए ताकि नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आ सके।”

API प्रणाली में खामियां, योग्य अभ्यर्थी होते हैं वंचित

वर्तमान API (Academic Performance Index) प्रणाली को लेकर अभ्यर्थियों में लंबे समय से असंतोष है। अनुभव प्रमाणपत्रों की सत्यता पर सवाल और अंक निर्धारण में अस्पष्टता जैसी समस्याएं योग्य उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाती हैं।
देश के प्रतिष्ठित संस्थान अशोका विश्वविद्यालय, धीरूभाई अंबानी आईसीटी, मणिपाल विश्वविद्यालय और अमृता विश्वविद्यालय ने आधुनिक और निष्पक्ष नियुक्ति प्रक्रिया अपनाकर API से जुड़ी कमियों को दूर किया है।

प्रो. लोहरा का कहना है कि “झारखंड यदि उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता स्थापित करना चाहता है, तो API प्रणाली का पुनर्गठन अनिवार्य है।”

बिहार विश्वविद्यालय सेवा आयोग का घोटाला, एक चेतावनी

बिहार में 1800 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति के दौरान 324 उम्मीदवारों द्वारा फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र का उपयोग किए जाने का मामला उजागर हुआ। इस घटनाक्रम ने पूरे देश में विश्वविद्यालय सेवा आयोगों की नियुक्ति प्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। प्रो. लोहरा का मत स्पष्ट है “बिहार में हुआ घोटाला झारखंड के लिए चेतावनी है। यदि हम समय रहते अपनी प्रणाली में सुधार नहीं करते, तो शिक्षा की रीढ़ और अधिक कमजोर होगी।”

शिक्षा सुधार समय की सबसे बड़ी जरूरत

उन्होंने कहा कि झारखंड के लिए लेक्चरर नियुक्ति प्रणाली में सुधार केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि भविष्य निर्माण की अनिवार्यता है। नियुक्तियों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, त्वरित और विश्वसनीय बनाना जरूरी है। राज्य को ऐसी व्यवस्था बनानी होगी जिसमें केवल सर्वश्रेष्ठ और योग्य शिक्षक ही विश्वविद्यालयों और कॉलेजों तक पहुंच सकें।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Follow on Google News
Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Threads Copy Link

Related Posts

पटना कोचिंग वार: बेउर जेल में बंद रौशन आनंद के भाई का नेपाल में मिला शव, जहर की आशंका

June 14, 2026

पाकिस्तान में महा-जलसंकट: बूंद-बूंद पानी को तरसा सिंध, ₹90 अरब का चावल उद्योग ठप!

June 14, 2026

आर्मी का नया ग्रूमिंग रूल: मूंछों की लंबाई 12 सेमी तय, परफ्यूम-डियोड्रेंट लगाने पर लगी रोक!

June 14, 2026

RECENT ADDA.

पटना कोचिंग वार: बेउर जेल में बंद रौशन आनंद के भाई का नेपाल में मिला शव, जहर की आशंका

June 14, 2026

पाकिस्तान में महा-जलसंकट: बूंद-बूंद पानी को तरसा सिंध, ₹90 अरब का चावल उद्योग ठप!

June 14, 2026

आर्मी का नया ग्रूमिंग रूल: मूंछों की लंबाई 12 सेमी तय, परफ्यूम-डियोड्रेंट लगाने पर लगी रोक!

June 14, 2026

सुबह-सुबह तीन कमर्शियल सिलेंडर फटने से दहली दिल्ली, मची भारी चीख-पुकार!

June 14, 2026

20 हजार की सैलरी और करोड़ों की जमीन, राम मंदिर के दान चोरों पर बड़ा एक्शन!

June 14, 2026
Today’s Horoscope
© 2026 Public Adda. Designed by Launching Press.
  • About
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Disclaimer
  • DMCA
  • Adsense

Home

News

Web Stories Fill Streamline Icon: https://streamlinehq.com

Web Stories

WhatsApp

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.