फॉण्ट कनवर्टर NEW

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, रामकी इंफ्रास्ट्रक्चर मामले में दिल्ली ही रहेगी आर्बिट्रेशन सीट

झारखंड हाईकोर्ट ने पथ निर्माण विभाग और रामकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बीच चल रहे विवाद में राज्य सरकार को राहत नहीं दी है। कोर्ट ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें मध्यस्थता की सीट दिल्ली तय की गई थी।

अपनी भाषा में पढ़ें

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने पथ निर्माण विभाग और रामकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बीच चल रहे विवाद में राज्य सरकार को राहत नहीं दी है। कोर्ट ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें मध्यस्थता की सीट दिल्ली तय की गई थी।

जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने पथ निर्माण विभाग की याचिका खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने समय पर दिल्ली को आर्बिट्रेशन सीट बनाए जाने का विरोध नहीं किया था। इसके अलावा विभाग ट्रिब्यूनल की कार्यवाही में भी लगातार शामिल होता रहा।

बाद में दिल्ली की सीट पर उठाई आपत्ति

मामला वर्ष 2010 में गोविंदपुर-साहिबगंज राज्य सड़क परियोजना के बरहेट-साहिबगंज हिस्से के पुनर्वास और उन्नयन से जुड़े समझौते का है।

समझौते में मध्यस्थता की कार्यवाही के लिए रांची में एक स्थान का उल्लेख था, लेकिन आर्बिट्रेशन की कानूनी सीट स्पष्ट नहीं थी। सितंबर 2023 में गठित ट्रिब्यूनल ने पहली प्रक्रियात्मक सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की मौजूदगी में दिल्ली को सीट तय किया था। उस समय राज्य सरकार ने इसका विरोध नहीं किया।

ट्रिब्यूनल के कार्यकाल के लिए दिल्ली हाईकोर्ट पहुंची कंपनी

बाद में रामकी इंफ्रास्ट्रक्चर ने आर्बिट्रल ट्रिब्यूनल का कार्यकाल बढ़ाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया। दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल का कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया।

इसके बाद राज्य सरकार ने दिल्ली के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाते हुए ट्रिब्यूनल और झारखंड हाईकोर्ट में आपत्ति दर्ज कराई।

कोर्ट ने सरकार के रुख को माना विरोधाभासी

झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार करीब ढाई साल तक ट्रिब्यूनल की कार्यवाही में शामिल रही और दिल्ली को सीट बनाए जाने के फैसले पर कोई आपत्ति नहीं की। वहीं, सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश का लाभ भी लिया।

अदालत ने कहा कि मध्यस्थता की सीट उसका कानूनी आधार होती है और इससे संबंधित अदालत का क्षेत्राधिकार तय होता है। कार्यवाही शुरू होने के बाद सीट को बदलने की मांग सामान्य तौर पर स्वीकार नहीं की जा सकती।

हाईकोर्ट ने इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए पथ निर्माण विभाग की याचिका खारिज कर दी और दिल्ली को ही इस मामले की मध्यस्थता की सीट बनाए रखा।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram