अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
Ramgarh : झारखंड के कुख्यात अपराधी मयंक सिंह उर्फ सुनील मीणा की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। एटीएस और पुलिस की पूछताछ में पता चला है कि मयंक सिंह अमन साहू का बेहद करीबी था और उसी के इशारे पर अपराध की दुनिया में पैर पसारता गया। अमन साहू अपराध जगत में अपने कमिटमेंट और मजबूत नेटवर्क के लिए कुख्यात था। मयंक पूरी तरह से उसकी इस खासियत पर फिदा था। जब भी उसे पैसे या हथियार की जरूरत होती, अमन बिना देर किए उपलब्ध करा देता था।
अमन साहू के जरिए ही मयंक का जुड़ाव लॉरेंस बिश्नोई गैंग से हुआ। लॉरेंस बिश्नोई, जो हिंदी पट्टी में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अपराधियों की तलाश कर रहा था, उसे अमन जैसे संपर्कों से आसानी से शूटर और अपराधी मिल जाते थे। मयंक भी उसी कड़ी का अहम हिस्सा बन गया। यही वजह थी कि उसका नाम झारखंड ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों तक दहशत का प्रतीक बन गया।
सूत्रों के अनुसार, अमन साहू ने सिर्फ झारखंड ही नहीं बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल तक अपने नेटवर्क को फैला रखा था। इन राज्यों में ऐसे अपराधी मौजूद थे, जो सिर्फ उसके एक इशारे पर किसी भी वारदात को अंजाम देने के लिए तैयार रहते थे। पुलिस सूत्रों का मानना है कि अमन साहू ने लॉरेंस बिश्नोई को महाराष्ट्र में अपराधियों की सप्लाई भी की थी। कम पैसों में उपलब्ध होने वाले शूटरों की बदौलत बिश्नोई ने महाराष्ट्र में भी अपना नेटवर्क मजबूत करने की योजना बनाई थी।
पूछताछ में यह भी सामने आया कि अमन साहू का प्रभाव इतना गहरा था कि कई अपराधी उसकी वफादारी और प्रतिबद्धता के चलते उसके साथ जुड़े रहते थे। मयंक सिंह भी उन्हीं में से एक था, जिसने अमन को अपना आदर्श मानते हुए अपराध की दुनिया में कदम रखा और बड़े गिरोहों से जुड़ गया।
ATS की टीम ने मयंक की गिरफ्तारी को एक बड़ी सफलता माना है। अधिकारियों का कहना है कि इससे अपराध जगत की एक बड़ी कड़ी टूट गई है। अब पुलिस लॉरेंस बिश्नोई गैंग और अमन साहू के शूटरों के बीच संबंधों की और गहराई से जांच कर रही है। सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि इस गिरफ्तारी से अपराध की कई परतें खुलेंगी और अपराधियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में मदद मिलेगी।

