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बोकारो के आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अंडा नहीं मिलने से आयोग नाराज, DC को कार्रवाई का निर्देश

Bokaro : आयोग की प्रभारी अध्यक्ष सह सदस्या, शबनम परवीन ने आज बोकारो जिला के चास प्रखंड अंतर्गत कुमरडागा पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ कि पूरे बोकारो जिला में मार्च 2025 से अब तक बच्चों को अंडा

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Bokaro : आयोग की प्रभारी अध्यक्ष सह सदस्या, शबनम परवीन ने आज बोकारो जिला के चास प्रखंड अंतर्गत कुमरडागा पंचायत के आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह खुलासा हुआ कि पूरे बोकारो जिला में मार्च 2025 से अब तक बच्चों को अंडा नहीं दिया जा रहा है। इस गंभीर मामले को आयोग की प्रभारी अध्यक्ष ने तत्काल DC बोकारो के संज्ञान में लाया।

DC ने इस पर तुरंत एक्शन लिया और जिला समाज कल्याण पदाधिकारी को निर्देशित किया कि 27 अगस्त 2025 से आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को अंडा वितरण शुरू किया जाए। यह कदम बच्चों के पोषण और उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसके अतिरिक्त, आयोग की प्रभारी अध्यक्ष ने पिंडराजोरा, चास और बोकारो में PDS दुकानों का निरीक्षण किया और आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने अनुमंडल अस्पताल, चास में स्थित कुपोषण उपचार केंद्र का भी निरीक्षण किया। इस दौरान केंद्र को साफ-सुथरा पाया गया और केंद्र में भर्ती बच्चों की माताओं ने बताया कि उन्हें सही तरीके से उपचार और अन्य सुविधाएँ मिल रही हैं।

इस क्रम में बोकारो परिसदन भवन में आयोग की प्रभारी अध्यक्ष की अध्यक्षता में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 से संबंधित बैठक आयोजित की गई। बैठक में झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष पर विशेष चर्चा हुई। शबनम परवीन ने बताया कि कुछ निर्धन और असहाय व्यक्तियों को इस अधिनियम के तहत लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे लाभुकों के लिए राज्य सरकार ने बजटीय उपबंध के तहत ग्राम पंचायत, नगर निकाय और उपायुक्त स्तर पर झारखंड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष गठित किया है।

आयोग की अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कोष का लाभ ऐसे निर्धन व्यक्तियों को मिलेगा जो स्वयं या उनके परिवार का कोई सदस्य जीविकोपार्जन करने में असमर्थ हो। विशेष परिस्थितियों में यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत आच्छादित है, लेकिन किसी कारणवश उसे अनाज नहीं मिल पा रहा है, तो उसे भी योग्य लाभुक माना जाएगा। बैठक में उपस्थित सभी संबंधित पदाधिकारियों को कोष का प्रभावी और पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

साथ ही आयोग में दर्ज शिकायतों की प्रति संबंधित पदाधिकारियों को उपलब्ध कराते हुए कार्रवाई करने और कार्रवाई की जानकारी आयोग को देने का निर्देश भी दिया गया। इस बैठक में अपर समाहर्ता सह जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

इस निरीक्षण और बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि राज्य सरकार और आयोग मिलकर बच्चों के पोषण, निर्धन लाभुकों तक खाद्यान्न वितरण और कुपोषण से लड़ने की दिशा में ठोस कदम उठा रहे हैं। स्थानीय जनता और अभिभावक इस पहल की सराहना कर रहे हैं।

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