रांची : 14वीं JPSC PT और Forest Range Officer (FRO) परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में रांची की अदालत ने लालू कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। CID की जांच में उनकी भूमिका को लेकर कई अहम बातें सामने आने का दावा किया गया है।
CID के अनुसार, इस मामले में गिरफ्तार अभय कुमार तिवारी ने लालू कुमार यादव को अपना एजेंट बताया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि लालू यादव अभय तिवारी और दूसरे अभ्यर्थियों के बीच संपर्क का काम करता था। अदालत ने केस डायरी में उपलब्ध सामग्री के आधार पर मामले में उनकी भूमिका की आगे जांच को जरूरी माना।
घर से OMR कॉपी और चेक मिलने का दावा
CID के मुताबिक, लालू यादव के घर की तलाशी के दौरान दूसरे अभ्यर्थियों की OMR उत्तरपुस्तिका की तीन कार्बन कॉपियां मिलीं। इसके अलावा अभय कुमार तिवारी के हस्ताक्षर वाला 8 लाख रुपये का चेक और कुछ बैंक खातों के ब्लैंक चेक मिलने की बात भी जांच एजेंसी ने अदालत को बताई।
1.40 लाख रुपये के UPI लेनदेन का जिक्र
जांच एजेंसी के अनुसार, लालू यादव और अभय कुमार तिवारी के बीच 1.40 लाख रुपये का UPI लेनदेन भी सामने आया है। CID ने इसे दोनों के बीच कथित वित्तीय संबंध से जोड़कर जांच का हिस्सा बनाया है।
जांच में यह भी सामने आया है कि लालू कुमार यादव ने 14वीं JPSC PT और FRO परीक्षा पास की थी। हालांकि, CID दूसरे अभ्यर्थियों से उनके कथित संपर्क और लेनदेन की भी जांच कर रही है।
बचाव पक्ष ने आरोपों का किया विरोध
लालू यादव के अधिवक्ता ने अदालत में आरोपों का विरोध किया। बचाव पक्ष ने कहा कि लालू न तो JPSC के कर्मचारी हैं और न TDPL के। उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है और उन्हें संदेह के आधार पर आरोपी बनाया गया है।
हालांकि, अदालत ने केस डायरी में उपलब्ध सामग्री को देखते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। लालू कुमार यादव फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं और CID उनकी तलाश कर रही है।




