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Bokaro: सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाना और कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए कितना चुनौतीपूर्ण होता है, इसका एक उदाहरण बोकारो के नावाडीह थाना क्षेत्र में देखने को मिला था। अब इसी मामले में तेनुघाट व्यवहार न्यायालय के एसीजेएम मनोज कुमार प्रजापति की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए तीन आरोपियों—रऊफ अंसारी, मोहीद्दीन अंसारी और साधु अंसारी को दोषी करार देते हुए एक-एक साल की सजा सुनाई है। साथ ही, अदालत ने तीनों पर 5-5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद नावाडीह अंचल के सुरही मौजा स्थित खाता नंबर 72 की सरकारी जमीन से जुड़ा है। तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) अंगार नाथ मिश्रा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि जब वे अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) बेरमो और सशस्त्र बल के साथ सरकारी जमीन की नापी या निरीक्षण के लिए पहुंचे थे, तभी इन आरोपियों ने करीब 50 अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर वहां हंगामा शुरू कर दिया।
पथराव और गाली-गलौज पर उतरी थी भीड़
शिकायत के मुताबिक, जब अधिकारियों ने भीड़ को समझाने की कोशिश की कि यह सरकारी जमीन है, तो आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की बल्कि ईंट-पत्थरों से पथराव भी शुरू कर दिया। सरकारी आदेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गईं और अधिकारियों को उनके कर्तव्य पालन से रोका गया। इस घटना के बाद नावाडीह थाने में मामला दर्ज किया गया था।
कोर्ट की कार्यवाही और जमानत
मामले की सुनवाई के दौरान सहायक लोक अभियोजक नवीन कुमार मिश्रा ने अभियोजन पक्ष की ओर से प्रभावी बहस की। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने तीनों को सजा सुनाई। हालांकि, सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने ऊपरी अदालत (हाईकोर्ट) में अपील करने के लिए आवेदन दिया। इसके आधार पर अदालत ने फिलहाल आरोपियों को जमानत पर छोड़ दिया है, ताकि वे उच्च न्यायालय में अपनी गुहार लगा सकें। यह फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो सरकारी कार्यों में बाधा डालने को सामान्य समझते हैं।

