Patna: बिहार में सहकारी संस्थाओं को केवल खाद्यान्न खरीद तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सहकारिता विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत राज्य के उत्कृष्ट प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) के अध्यक्षों और प्रबंधकों के लिए विशेष उन्मुखीकरण एवं अनुभव साझाकरण कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है। ये कार्यशालाएं 24 अक्टूबर 2026 को सहकारिता प्रशिक्षण केंद्र, पूसा (समस्तीपुर) तथा 26 अक्टूबर 2026 को दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारिता प्रबंधन संस्थान, पटना में संपन्न होंगी।
गैर-कृषि उद्यमों से जुड़ेंगे पैक्स: पत्तल, स्लीपर और सोलर असेंबली की ट्रेनिंग
इन कार्यशालाओं का मुख्य उद्देश्य उत्कृष्ट पैक्सों की सफल कार्यप्रणालियों और नवाचारों को अन्य सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाना है। पैक्सों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर बहुउद्देशीय व्यावसायिक इकाइयों के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत उन्हें विभिन्न गैर-कृषि और सेवा आधारित उद्यमों की ट्रेनिंग दी जाएगी, जिनमें प्रमुख रूप से पत्तल एवं प्लेट निर्माण, स्लीपर निर्माण, सिलाई इकाई, सोलर एलईडी बल्ब की असेंबली व बिक्री, जन औषधि केंद्र और स्थानीय मांग के अनुसार अन्य स्वरोजगार के विकल्प शामिल हैं।
सरकारी योजनाओं और क्रेडिट गारंटी से जुड़ने का सुनहरा मौका
कार्यशाला के दौरान पैक्सों को केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसमें सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना, फूड प्रोसेसिंग के औपचारिकीकरण की योजना, कृषि अवसंरचना कोष (AIF), पीएम किसान समृद्धि केंद्र, पीएम-कुसुम योजना और ‘जीविका’ के माध्यम से मिलने वाली व्यावसायिक संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा होगी। इन योजनाओं की मदद से पैक्स भंडारण, सौर ऊर्जा और ग्रामीण खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपनी पहुंच और आय को बढ़ा सकेंगे।
वित्तीय और प्रबंधकीय दक्षता पर रहेगा विशेष फोकस
सहकारी समितियों को बैंक ऋण और सरकारी अनुदान प्राप्त करने में कोई अड़चन न आए, इसके लिए कार्यशाला में उनकी वित्तीय और प्रबंधकीय तैयारी पर भी विशेष सत्र रखे गए हैं। इसमें पंजीकरण प्रमाणपत्र, ऑडिटेड वित्तीय विवरण, प्रबंध समिति के प्रस्ताव, डीपीआर (प्रोजेक्ट रिपोर्ट), भूमि-भवन की उपलब्धता, बैंक खाते और केवाईसी जैसे जरूरी दस्तावेजों को दुरुस्त करने के तौर-तरीके समझाए जाएंगे। इस पहल से न केवल पैक्सों के बीच आपसी सहयोग बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी एक नया और आधुनिक आयाम मिलेगा।





