Patna: राज्य में विभिन्न नदियों के उफान के बाद अब बाढ़ प्रभावित इलाकों में संक्रमण और जलजनित महामारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने राज्यव्यापी महाभियान छेड़ दिया है। 15 जिलों के 1,687 गांवों में फैली विभीषिका के बीच लोगों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए धरातल पर 1,758 चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की 343 मोबाइल टीमों ने सुदूर क्षेत्रों में पहुंचकर अब तक 2 लाख 92 हजार 584 मरीजों का ओपीडी के माध्यम से सफल उपचार किया है। इसके साथ ही दूषित पानी के खतरे को देखते हुए 1 लाख 29 हजार से अधिक लोगों के बीच हैलोजन गोलियों का वितरण किया गया है।
47 बोट एंबुलेंस से घर-घर जांच
बाढ़ का पानी घिरे रहने के कारण जिन गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट चुका है, वहां स्वास्थ्य कर्मियों को पहुंचाने के लिए 47 विशेष बोट एंबुलेंस तैनात की गई हैं। यह टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं और जरूरी दवाएं बांट रही हैं। जलजमाव हटने के साथ मच्छरों और बैक्टीरिया के फैलाव को रोकने के लिए विभाग ने प्रभावित जिलों के 2,323 गांवों में ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव कराया है। अरवल, भोजपुर, बक्सर, भागलपुर, कटिहार, खगड़िया, मुंगेर, पटना, समस्तीपुर, सारण, वैशाली, लखीसराय, पूर्णिया, बेगूसराय और मधेपुरा में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
536 टीमों की विशेष निगरानी
संवेदनशील समूहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आशा, आशा फैसिलिटेटर और एएनएम की कुल 536 विशेष टीमों को फील्ड में उतारा है। यह टीमें गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों और गैर-संचारी रोगों (NCD) के मरीजों की सूची तैयार कर उनकी नियमित मॉनिटरिंग कर रही हैं। सुरक्षित प्रसव कराने, डायरिया के लक्षणों पर नजर रखने और आपात स्थिति में मरीजों को तुरंत बड़े अस्पतालों में रेफर करने की पुख्ता व्यवस्था की गई है, जिससे मृत्यु दर को नियंत्रित रखा जा सके।
300 पंचायतों में शुद्ध पेयजल
बाढ़ के दौरान महामारी का सबसे बड़ा कारण दूषित पेयजल होता है, जिसके समाधान के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) युद्धस्तर पर सक्रिय है। पटना, आरा, वैशाली, सारण और भागलपुर सहित 72 प्रखंडों की 300 ग्राम पंचायतों में टैंकरों और वाटर एटीएम से लगातार साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। विभाग ने 444 से अधिक चापाकलों का कीटाणुशोधन (डिसइन्फेक्शन) किया है और 125 क्षतिग्रस्त चापाकलों की मरम्मत पूरी कर ली है। इसके अलावा 147 राहत शिविरों में 1,662 शौचालयों और 153 स्नानागारों का निर्माण कराया गया है, ताकि स्वच्छता बनी रहे और संक्रमण का प्रसार रोका जा सके।




