अपनी भाषा चुनेें :
बटन दबाकर थोड़ा इंतज़ार करें...
रांची: झारखंड के हज यात्रियों के लिए साल 2026 की यात्रा न केवल आध्यात्मिक रूप से खास होगी, बल्कि राज्य सरकार के सहयोग से सुगम भी होने वाली है। रांची में बुधवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री और राज्य हज कमेटी के अध्यक्ष डॉ. इरफान अंसारी ने स्पष्ट किया कि सरकार हाजियों की सेवा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेगी।
मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं और सख्त समय सीमा
मंत्री ने घोषणा की कि हज यात्रियों की सभी मेडिकल जांच और वैक्सीनेशन (टीकाकरण) का पूरा खर्च अब झारखंड सरकार वहन करेगी। यह फैसला आर्थिक रूप से कमजोर यात्रियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। बैठक में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को सख्त हिदायत दी गई है कि 7 फरवरी तक हर हाल में मेडिकल स्क्रीनिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इसके तुरंत बाद, 8 फरवरी से वैक्सीनेशन का काम शुरू किया जाएगा। डॉ. अंसारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि इस नेक काम में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
रूट और इमिग्रेशन की चिंता
झारखंड से इस बार लगभग 1670 यात्रियों का हज पर जाना प्रस्तावित है। हालांकि, रांची से इमिग्रेशन प्वाइंट हटाए जाने को लेकर मंत्री ने चिंता व्यक्त की है। उन्होंने बताया कि झारखंड के हाजियों की सुविधा के लिए वे हज कमेटी ऑफ इंडिया से लगातार संपर्क में हैं, ताकि उन्हें स्थानीय स्तर पर ही इमिग्रेशन की सुविधा मिल सके और लंबी दूरी का सफर तय न करना पड़े।
समन्वय पर जोर
बैठक में यह बात भी उभरकर आई कि वीजा प्रक्रिया और वैक्सीनेशन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अगर स्क्रीनिंग में देरी हुई, तो वीजा मिलने में दिक्कत आ सकती है। इसीलिए रांची सदर अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. प्रभात रंजन सहित राज्यभर के अधिकारियों को आपसी तालमेल बेहतर करने का निर्देश दिया गया है। कुल मिलाकर, झारखंड सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर हाजी सुरक्षित, स्वस्थ और बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी मुकद्दस यात्रा पूरी कर सके।

