Bhojpur: बिहार के भोजपुर जिले के बिहिया प्रखंड अंतर्गत चकवथ गांव में जल संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता की एक अनुकरणीय मिसाल सामने आई है। कभी घनी जलकुंभी के जाल में पूरी तरह जकड़ा 52 बीघा का विशाल पोखर अब अपने स्वच्छ, निर्मल और सुंदर स्वरूप में लौट आया है। एक समय ऐसा था जब पूरे जलाशय में पानी की एक बूंद तक नजर नहीं आती थी और गंदगी के चलते लोग इसके तट पर जाने से कतराते थे। जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की साझी पहल से इस ऐतिहासिक जलस्रोत का न केवल कायाकल्प हुआ है, बल्कि यह पर्यावरण सुधार का बड़ा केंद्र बन चुका है।
ग्रामीणों ने मिलकर चलाया महाअभियान
इस 52 बीघे के पोखर के जीर्णोद्धार के लिए जिलाधिकारी (DM) और उप विकास आयुक्त (DDC) की पहल पर सभी संबंधित विभागों की एक उच्चस्तरीय कन्वर्जेंस बैठक बुलाई गई थी। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से सफाई का विशेष अभियान शुरू हुआ। अभियान में जिला स्वच्छता कर्मियों के साथ राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम, स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट हुए। कई दिनों के अथक परिश्रम के बाद विशाल क्षेत्र में फैली जलकुंभी और गाद को बाहर निकाला गया। स्थानीय निवासी रोहित कुमार बताते हैं कि पहले इस रास्ते से गुजरना भी मुश्किल था, लेकिन अब मंदिर के सामने पक्के घाट और सीढ़ियों के बनने से यह पोखर पूरे गांव का गौरव बन चुका है।
फ्लोटिंग ट्रीटमेंट वेटलैंड्स और ‘केना इंडिका’ से जैविक जल शोधन
सफाई के बाद पानी की गुणवत्ता को लंबे समय तक स्वच्छ और शुद्ध बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक नवाचार का सहारा लिया जा रहा है। भोजपुर के जिला समन्वयक रंजय बैठा के अनुसार, पानी के केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (COD) और बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) को नियंत्रित रखने के लिए ‘फ्लोटिंग ट्रीटमेंट वेटलैंड्स’ (FTW) तकनीक अपनाई गई है। यह एक कृत्रिम तैरता हुआ ढांचा होता है, जिस पर ‘केना इंडिका’ (स्थानीय भाषा में कर्दमानी या केला प्रजाति) के पौधे रोपे गए हैं। इन पौधों की जड़ें पानी में तैरते हुए अतिरिक्त पोषक तत्वों और दूषित तत्वों को सोखकर प्राकृतिक फिल्टर की तरह काम करती हैं, जिससे पानी में दुर्गंध और शैवाल नहीं पनपते।
डोर-टू-डोर कचरा उठाव से दोबारा प्रदूषण पर पूर्ण रोक
बिहिया की प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) मोनालिसा प्रियदर्शनी ने बताया कि डीडीसी के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस पुनरुद्धार कार्य में जनभागीदारी सबसे मजबूत कड़ी रही है। पोखर के चारों ओर बसे सभी घरों को स्वच्छता अभियान से जोड़ते हुए डोर-टू-डोर कचरा उठाव की व्यवस्था लागू की गई है, ताकि कोई भी घरेलू कचरा सीधे जल निकाय में न गिरे। प्रशासन और ग्रामीणों का यह साझा प्रयास साबित करता है कि परंपरागत जलस्रोतों का संरक्षण केवल सरकारी आदेशों से नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय के जागरूक सहयोग से ही चिरस्थायी बन सकता है।




