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Ranchi : वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया अंतरिम आदेश के बाद अमारत-ए-शरीयत बिहार, ओडिशा और झारखंड के अमीर शरीयत हजरत मौलाना अहमद वली फैसल रहमानी ने कहा कि अदालत के फैसले का सम्मान किया जाता है, लेकिन अधिनियम के पूर्ण रद्दीकरण तक संघर्ष जारी रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस कानून की कई धाराएं वक्फ की मूल इस्लामी व कानूनी पहचान को कमजोर करती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कुछ प्रावधानों पर रोक लगाई है। अदालत ने फिलहाल यह स्पष्ट किया कि वक्फ बनाने के लिए “पांच साल से मुस्लिम होने” की शर्त तब तक लागू नहीं होगी, जब तक राज्यों द्वारा इसका सत्यापन तंत्र तैयार नहीं किया जाता। कोर्ट ने यह भी कहा कि वक्फ संपत्ति से जुड़े विवादों का निपटारा प्रशासन नहीं, बल्कि अदालत या ट्रिब्यूनल करेंगे।
गैर-मुस्लिम सदस्यों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय वक्फ परिषद में अधिकतम चार और राज्य वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनुमति दी, जबकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी यथासंभव मुस्लिम ही रहेंगे। पंजीकरण की शर्त को यथावत रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ये निर्देश अस्थायी हैं और अंतिम सुनवाई में दोनों पक्षों को पूरा अवसर मिलेगा।
अमीर शरीयत ने कहा कि अधिनियम की कई अन्य धाराएं अब भी लागू हैं, जो वक्फ संपत्तियों के लिए गंभीर खतरा हैं। धारा 107 के तहत लिमिटेशन एक्ट 1963 लागू होने से पुराने अवैध कब्जों को हटाना कठिन होगा। धारा 40 हटाकर संपत्ति के वक्फ होने या न होने का अधिकार वक्फ बोर्ड से छीन लिया गया है। पंजीकरण व सर्वेक्षण का अधिकार कलेक्टर को दिए जाने से शुरुआती स्तर पर ही वक्फ संपत्तियों को रोका जा सकता है।
देशभर में करीब 58,929 वक्फ संपत्तियां अवैध कब्जे या विवादों से जुड़ी हैं। अमीर शरीयत ने कहा कि पुराने कानून के बावजूद जब कब्जे नहीं हट सके, तो मौजूदा अधिनियम वक्फ संस्थाओं को और कमजोर करेगा। उन्होंने मांग की कि इस कानून को पूरी तरह रद्द किया जाए और वक्फ अधिनियम 1995 (संशोधन 2013) के आधार पर नया, सशक्त ढांचा बनाया जाए।
उन्होंने सुझाव दिया कि वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का चयन मुसलमानों के प्रत्यक्ष प्रतिनिधित्व से होना चाहिए और कब्जा हटाने के लिए बोर्ड को त्वरित अधिकार दिए जाएं, जैसे अन्य धार्मिक संस्थाओं के कानूनों में है। अंत में उन्होंने सभी नागरिकों, विशेषकर मुसलमानों से अपील की कि वे वक्फ संपत्तियों की रक्षा और संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण के लिए एकजुट होकर शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रखें।

