Lifestyle Adda: क्या आपका युवा होता बच्चा अक्सर कमर या पीठ दर्द की शिकायत करता है? अगर हां, तो आपको सावधान होने की जरूरत है। अक्सर लोग बच्चों की इस तरह की शिकायतों को मामूली समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह समस्या उनके स्वास्थ्य, पढ़ाई और रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डाल सकती है। हाल ही में सामने आए एक अध्ययन के अनुसार, ऐसे बच्चे मानसिक तनाव, एंग्जाइटी और अवसाद (डिफ्रेशन) का शिकार होने के साथ-साथ स्मोकिंग और ड्रिंकिंग जैसी बुरी आदतों की तरफ भी तेजी से आकर्षित हो सकते हैं।
दर्द की फ्रीक्वेंसी और बढ़ती समस्याएं
अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि बच्चों में दर्द की फ्रीक्वेंसी जितनी अधिक होती है, उसी अनुपात में स्मोकिंग, ड्रिंकिंग और स्कूल से गैरहाजिर होने (स्कूल मिस करने) के मामले भी बढ़ते जाते हैं। करीब 14 से 15 साल की उम्र के जिन बच्चों को हफ्ते में दो से तीन बार से ज्यादा पीठ दर्द की समस्या हुई, वे दर्द से मुक्त रहने वाले बच्चों की तुलना में दो से तीन गुना ज्यादा स्मोकिंग और ड्रिंकिंग करते पाए गए।
पढ़ाई और स्कूल पर असर
बच्चों की सेहत से जुड़ी यह अनदेखी उनके भविष्य और शिक्षा पर भी भारी पड़ती है। जिन बच्चों को हफ्ते में एक से ज्यादा बार बैकपेन की शिकायत होती है, वे सामान्य बच्चों की तुलना में दोगुना ज्यादा स्कूल मिस करते हैं। ऐसे में माता-पिता की यह जिम्मेदारी बन जाती है कि वे बच्चों के शारीरिक दर्द को केवल थकावट मानकर न टालें, बल्कि समय रहते डॉक्टर से परामर्श लें और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी पूरा ध्यान दें।






