रांची: दीपावली से पहले स्थानीय कुम्हारों को प्रोत्साहित करने के लिए रांची के DC मंजूनाथ भजन्त्री ने शुक्रवार को खास पहल की। वे अरसंडे स्थित बोडया रोड के जय प्रकाश नगर की कुम्हार बस्ती पहुंचे और कारीगरों से मिट्टी के दीये खरीदे। इस दौरान उन्होंने कुम्हार परिवारों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ली।
DC ने कहा कि जिला प्रशासन कुम्हार परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके पारंपरिक काम को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रहा है।
कुम्हारों को उपकरण और प्रशिक्षण दे रहा प्रशासन
DC मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया कि जिला प्रशासन मुख्यमंत्री लघु कुटीर बोर्ड के माध्यम से कुम्हार परिवारों को मदद दे रहा है। इसके तहत उन्हें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, प्रशिक्षण और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि जिला इनोवेशन फंड के माध्यम से भी कारीगरों को जरूरी उपकरण और बेहतर सुविधाएं देने की योजना है, ताकि वे अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें।
स्थानीय कुम्हारों से दीये खरीदने की अपील
DC ने आम लोगों से अपील की कि वे दीपावली पर स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीये खरीदें। उन्होंने कहा कि दीये बनाने में पूरे परिवार को काफी मेहनत करनी पड़ती है। मिट्टी तैयार करने से लेकर दीये बनाने और रंगने तक में कई दिन लगते हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों को कारीगरों की मेहनत का उचित मूल्य देना चाहिए। स्थानीय दीये खरीदने से कुम्हार परिवारों को आर्थिक मदद मिलेगी और उनकी पारंपरिक कला भी बची रहेगी।
खराब सड़क की मरम्मत का दिया निर्देश
कुम्हार बस्ती के दौरे के दौरान DC ने एक महिला कारीगर से पेंशन मिलने की जानकारी भी ली। महिला ने बताया कि उसे पेंशन मिल रही है। वहीं, इलाके की खराब सड़क को देखते हुए उन्होंने संबंधित अधिकारी को जल्द मरम्मत कराने का निर्देश दिया।
इस दौरान DC ने डिजिटल माध्यम से दीयों का भुगतान किया। एक छोटी बच्ची ने उन्हें मिट्टी से बना खिलौना उपहार में दिया, जिसे देखकर वे खुश हुए। उन्होंने बच्ची को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
कई अधिकारी रहे मौजूद
इस मौके पर एसडीओ सदर रांची कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी धनंजय, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, ट्रेनी आईएएस आस्था शरण, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय और डीआरपी रांची आतेन विश्वासी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
जिला प्रशासन का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य कुम्हार परिवारों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी समस्याओं का समाधान करना और पारंपरिक मिट्टी कला को आगे बढ़ाना है।






