फॉण्ट कनवर्टर NEW

Advertisement
Advertisement

बेशकीमती सरकारी जमीन को खाली करने का 15 दिनों का अल्टीमेटम, चलेगा बुलडोजर

हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक्शन मोड में आवास बोर्ड, हरमू मौजा की 26 डिसमिल जमीन न छोड़ने पर चलेगा कानूनी हंटर, खर्च भी कब्जेदारों से होगा वसूल

अपनी भाषा में पढ़ें

रांची: राजधानी के पॉश इलाके हरमू में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के खिलाफ झारखंड राज्य आवास बोर्ड (नगर विकास एवं आवास विभाग) ने सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। आवास बोर्ड प्रबंधन ने मौजा हरमू स्थित खाता संख्या-82, प्लॉट संख्या-744 के अंतर्गत आने वाली 26 डिसमिल अतिक्रमित भूमि को खाली करने के लिए कब्जाधारियों को 15 दिनों की समय-सीमा तय करते हुए नोटिस जारी किया है। यह नोटिस लेक रोड, टिलु नाजिर लेन (हिन्दपीढ़ी, रांची) निवासी स्वर्गीय कुंवर राम रजक के पुत्रों सोना राम रजक एवं दिनेश राम रजक के नाम सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है।

अधिग्रहित 14.33 एकड़ भूमि का हिस्सा है यह भूखंड

आवास बोर्ड द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह विवादित 26 डिसमिल जमीन भू-अर्जन रांची द्वारा एल०ए० केस संख्या–02/1965-66 के तहत विधिवत अधिग्रहित की गई कुल 14.33 एकड़ भूमि का ही एक हिस्सा है। पूर्व में यह भूखंड एकीकृत बिहार राज्य आवास बोर्ड को आवास सुधार योजना (Housing Improvement Scheme) के क्रियान्वयन हेतु हस्तांतरित किया गया था, जो राज्य पुनर्गठन के बाद अब पूर्ण रूप से झारखंड राज्य आवास बोर्ड की विधिक संपत्ति है। बोर्ड का स्पष्ट कहना है कि इस जमीन का मालिकाना हक किसी निजी व्यक्ति के पास नहीं है।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद निष्प्रभावी हुआ निचली अदालत का डिक्री आदेश

विभागीय नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि विपक्षी पक्ष द्वारा टाइटल सूट संख्या–174/1993 एवं एग्जीक्यूशन केस संख्या–26/2025 के माध्यम से जिला प्रशासन के सहयोग से बोर्ड की जमीन पर अनधिकृत कब्जा हासिल कर लिया गया था। हालांकि, आवास बोर्ड द्वारा इस मामले को झारखंड उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई। उच्च न्यायालय ने 1 सितंबर 2026 को पारित अपने ऐतिहासिक आदेश में साफ कर दिया कि निचली अदालत के टाइटल सूट की डिक्री आवास बोर्ड पर बाध्यकारी (binding) नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने बोर्ड को अपने अधिनियम के तहत अधिग्रहित भूमि से किसी भी प्रकार के अवैध अतिक्रमण को हटाने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र करार दिया है।

अधिनियम की धारा 89 और 83 (अ) के तहत बेदखली का फरमान

उच्च न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बाद आवास बोर्ड ने ‘झारखंड राज्य आवास बोर्ड अधिनियम’ की धारा 89 एवं 83 (अ) के तहत प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अतिक्रमणकारियों को कड़ा फरमान सुनाया है:
  • 15 दिनों में कब्जा सौंपने का निर्देश: नोटिस प्रकाशन की तिथि से ठीक 15 दिनों के भीतर उक्त 26 डिसमिल जमीन को खाली कर बोर्ड को शांतिपूर्ण कब्जा सौंपना होगा।
  • प्रशासनिक बल से होगी बेदखली: यदि निर्धारित अवधि में जमीन खाली नहीं की गई, तो जिला प्रशासन और पुलिस बल के सहयोग से बलपूर्वक बेदखली (Eviction Drive) की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
  • कब्जेदारों से वसूला जाएगा खर्च: अतिक्रमण हटाने की इस पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया में आने वाला संपूर्ण खर्च भू-राजस्व (Land Revenue) की बकाया राशि की तरह संबंधित कब्जेदारों से ही वसूला जाएगा।
  • अंतिम समय-सीमा: तय समय बीत जाने के बाद इस संबंध में किसी भी प्रकार के आवेदन, राहत या अनुरोध पर विचार नहीं किया जाएगा। इसे विभाग द्वारा अंतिम चेतावनी के रूप में मानने को कहा गया है।
Advertisement
WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram