रांची: झारखंड में नवजातों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा किशोरी बालिकाओं को कुपोषण के चक्र से बाहर निकालने के लिए राज्य सरकार ने पूरक पोषाहार वितरण व्यवस्था में आमूलचूल सुधार की दिशा में एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में केंद्र प्रायोजित ‘मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0’ के तहत टेक होम राशन (THR) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु खुली निविदा (टेंडर) प्रक्रिया को मंजूरी दी गई।
राज्य सरकार ने इसके तहत निर्माणकर्ता-सह-आपूर्तिकर्ताओं के पारदर्शी चयन के लिए ‘झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज मैनुअल 2024’ (JPGSM 2024) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के कुछ कड़े तकनीकी नियमों में शिथिलता (छूट) देने के प्रस्ताव को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान की है, ताकि जमीनी स्तर पर पोषाहार का वितरण बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रह सके।
क्या है योजना और किन्हें मिलेगा इसका सीधा लाभ?
सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0 के अंतर्गत संचालित पूरक पोषाहार कार्यक्रम (SNP) और किशोरी बालिकाओं के लिए योजना (SAG) झारखंड के ग्रामीण व सुदूर जनजातीय अंचलों में स्वास्थ्य सुरक्षा की रीढ़ हैं। इसके तहत लाभार्थियों को टेक होम राशन के रूप में विशेष ‘माइक्रोन्यूट्रिएंट फोर्टिफाइड फूड और एनर्जी डेंस फूड’ (MFEDF) दिया जाता है।
यह केवल सामान्य अनाज नहीं होता, बल्कि इसमें सूक्ष्म पोषक तत्व—जैसे आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन-ए, विटामिन-बी12, कैल्शियम और जरूरी मिनरल्स—वैज्ञानिक अनुपात में मिले होते हैं। यह विशेष आहार एनिमिया (खून की कमी) से जूझ रही किशोरियों और गर्भवती महिलाओं तथा वजन की कमी से जूझ रहे बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास के लिए संजीवनी का काम करता है।
टेंडर नियमों में शिथिलता क्यों बनी जरूरी?
विशाल आबादी और भौगोलिक विषमताओं वाले झारखंड में समय पर गुणवत्तापूर्ण पोषाहार पहुंचाना हमेशा एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है। अक्सर एक ही आपूर्तिकर्ता पर निर्भर रहने से लॉजिस्टिक्स या उत्पादन में गड़बड़ी आने पर पूरे जिले में महीनों तक राशन का वितरण ठप हो जाता था।
इसी जोखिम को समाप्त करने के लिए कैबिनेट ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण रियायतें दी हैं:
- दीर्घकालिक अनुबंध (3 + 1 वर्ष):JPGSM 2024 की कंडिका-5.8.2.3 और 5.8.2.9 को शिथिल करते हुए अनुबंध की अवधि 3 वर्ष तय की गई है, जिसे संतोषजनक कार्य के आधार पर 1 वर्ष के लिए और बढ़ाया जा सकेगा। इससे बार-बार हर साल निविदा निकालने की लंबी कानूनी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी और आपूर्ति में निरंतरता बनी रहेगी।
- बिड स्प्लिटिंग (Bid Splitting) की व्यवस्था:कंडिका-5.8.2.5 को शिथिल करते हुए काम को एक से अधिक सफल निविदादाताओं में विभाजित करने की अनुमति दी गई है। इसका मतलब है कि राज्य के विभिन्न प्रमंडलों या जिलों के लिए एक से ज्यादा सक्षम कंपनियों का चयन किया जाएगा। यदि किसी एक एजेंसी की सप्लाई चेन प्रभावित भी होती है, तो दूसरी एजेंसी तुरंत मोर्चा संभाल सकेगी और बच्चों का निवाला नहीं रुकेगा।
- मानकों में आंशिक व्यवहारिकता:राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA 2013) की अनुसूची-II के तहत निर्धारित प्रोटीन पाचकता मानक (PDCAAS) को आंशिक रूप से शिथिल रखने की स्वीकृति दी गई है। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मोटे अनाज (मिलेट्स) और पारंपरिक खाद्य पदार्थों के उपयोग को प्रोत्साहित करने तथा उत्पादन प्रक्रियाओं को व्यावहारिक बनाने के लिए यह तकनीकी छूट जरूरी मानी जा रही थी।
जमीनी स्तर पर क्या होगा बदलाव?
झारखंड के समाज कल्याण और महिला-बाल विकास विभाग का मानना है कि इस नीतिगत फैसले से प्रदेश के 38 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों पर टेक होम राशन का नियमित स्टॉक बना रहेगा। जब पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य सामग्री समय पर आंगनबाड़ियों तक पहुंचेगी, तो बच्चों के नाटेपन (Stunting) और दुर्बलता (Wasting) के आंकड़ों में तेजी से गिरावट आएगी।
कैबिनेट का यह फैसला यह स्पष्ट संदेश देता है कि राज्य सरकार प्रक्रियाओं की जटिलताओं से ऊपर उठकर जनकल्याण और पोषण सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।





