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400 रुपये का चालान भरने के लिए मांगे 1119 रुपये, निजी पोर्टलों की मनमानी से लोग परेशान

राजधानी रांची में ट्रैफिक चालान कटने के बाद उसका भुगतान करना वाहन मालिकों के लिए मुश्किल हो गया है। सरकारी ई-चालान पोर्टल पर तकनीकी खराबी के कारण लोग ऑनलाइन पैसे जमा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें थर्ड पार्टी ऐप और वेबसाइट का

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रांची : राजधानी रांची में ट्रैफिक चालान कटने के बाद उसका भुगतान करना वाहन मालिकों के लिए मुश्किल हो गया है। सरकारी ई-चालान पोर्टल पर तकनीकी खराबी के कारण लोग ऑनलाइन पैसे जमा नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें थर्ड पार्टी ऐप और वेबसाइट का सहारा लेना पड़ रहा है। लेकिन इन निजी पोर्टलों पर चालान की राशि के अलावा अतिरिक्त शुल्क भी लिया जा रहा है। इससे लोगों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है।

150 रुपये का चालान भरने के लिए देने पड़ रहे 349 रुपये

जोड़ा तालाब निवासी एक व्यक्ति की बुलेट का गलत पार्किंग के कारण 150 रुपये का चालान कटा था। जब उन्होंने निजी वेबसाइट से भुगतान करना चाहा, तो कुल 349.42 रुपये मांगे गए। इसमें 169 रुपये सेटलमेंट फीस और 30.42 रुपये जीएसटी शामिल था।

इसी तरह धुर्वा की पूजा कुमारी के दो चालान मिलाकर 2,000 रुपये के थे। निजी पोर्टल पर भुगतान करने के दौरान उनसे 2,446.04 रुपये मांगे गए। यानी चालान की राशि से 446.04 रुपये अधिक। वहीं रातू रोड के मनोज को 400 रुपये का चालान भरने के लिए 1,119 रुपये का भुगतान करने को कहा गया।

छह महीने से सरकारी पोर्टल पर आ रही परेशानी

झारखंड सरकार का ई-चालान पोर्टल करीब छह महीने से ठीक से काम नहीं कर रहा है। केंद्र सरकार के परिवहन पोर्टल पर भी भुगतान के दौरान दिक्कतें आ रही हैं। कभी कैप्चा नहीं खुलता, तो कभी चालान का रिकॉर्ड नहीं मिलता है।

कोकर निवासी रंजीत कुमार ने बताया कि हेलमेट नहीं पहनने पर उनका चालान कटा था। उन्होंने कई बार सरकारी पोर्टल पर चालान की जानकारी निकालने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। निजी वेबसाइट पर अतिरिक्त पैसे मांगे जाने के कारण उन्होंने भुगतान नहीं किया।

रांची में 150 करोड़ रुपये से अधिक का चालान बकाया

रांची में ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लगातार चालान काटे जा रहे हैं। जुलाई से सितंबर के बीच 3,07,071 चालान काटे गए। यानी हर महीने औसतन एक लाख से अधिक चालान जारी हुए।

जानकारी के अनुसार, राजधानी में 150 करोड़ रुपये से ज्यादा की चालान राशि बकाया है। भुगतान की सुविधा ठीक नहीं होने से यह समस्या और बढ़ रही है।

समय सीमा खत्म होने पर कोर्ट जाना पड़ता है

चालान जमा करने की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद मामला कोर्ट में भेज दिया जाता है। इसके बाद कोर्ट की अनुमति से कचहरी रोड स्थित ट्रैफिक कार्यालय में चालान की राशि जमा करनी पड़ती है।

इस प्रक्रिया में लोगों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। कई लोगों का कहना है कि ऑनलाइन भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें बेवजह कार्यालय और कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

निजी पोर्टलों तक वाहन मालिकों का डेटा पहुंचने पर सवाल

थर्ड पार्टी पोर्टलों के पास वाहन मालिकों के चालान की जानकारी पहुंचने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों को निजी कंपनियों की ओर से चालान जमा करने के मैसेज मिल रहे हैं। इसके साथ ही भुगतान के दौरान अतिरिक्त शुल्क भी जोड़ा जा रहा है।

इन शिकायतों को लेकर परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) को पत्र लिखा है। वहीं सरकारी पोर्टल पर सर्वर की समस्या सामने आने के बाद उसे ठीक करने का काम किया जा रहा है। फिलहाल लोगों को चालान जमा करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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