Ranchi: लाखों होनहार नौजवान जब रात-दिन एक कर पढाई में पसीना बहाते हैं, तब सिस्टम के कुछ सफेदपोश दलाल उनकी किस्मत का रेट कार्ड तय कर रहे होते हैं। ओएमआर शीट खाली छुड़वाकर 70 लाख में अफसर की कुर्सी बेचना सिर्फ एक घोटाला नहीं, बल्कि पूरे राज्य के नौजवानों के सपनों का कत्ल है। सीआईडी ने चार्जशीट दाखिल कर कानूनी नकेल तो कसी है, लेकिन जब तक उन ‘खरीददार’ अभ्यर्थियों और सफेदपोश संरक्षकों के चेहरे बेनकाब नहीं होते, तब तक इस सूबे में परीक्षा की शुचिता बहाल नहीं हो पाएगी।
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झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में ओएमआर शीट की हेराफेरी, गोपनीय डेटा में सेंधमारी और मेधा की सौदेबाजी से जुड़े बहुचर्चित घोटाले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने अपना कानूनी शिकंजा कस दिया है। जांच एजेंसी ने 90 दिनों की वैधानिक समयसीमा समाप्त होने से ठीक पहले बुधवार शाम रांची की विशेष अदालत में पांच मुख्य आरोपियों के खिलाफ पहली औपचारिक चार्जशीट दाखिल कर दी। सीआईडी की इस त्वरित और समयबद्ध कार्रवाई के बाद अब गिरफ्तार अभियुक्तों के लिए कानूनी दांवपेंच के जरिए ‘डिफॉल्ट बेल’ पाने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया है।
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श्वेता गुप्ता और मास्टरमाइंड आरवी सिंह समेत पांच पर आरोप पत्र
सीआईडी द्वारा दाखिल पहली चार्जशीट में आयोग की तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, डेटा मैनेजमेंट एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के निदेशक व मास्टरमाइंड रामवीर सिंह उर्फ आरवी सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी तथा एजेंसी कर्मी मो. उस्मान और मो. एबाद को मुख्य आरोपी बनाया गया है। अदालत को सौंपी गई केस डायरी और फॉरेंसिक रिपोर्ट में आयोग की परीक्षा प्रणाली में सेंध लगाने वाले एक संगठित ‘मेधा सिंडिकेट’ की कार्यप्रणाली का विस्तृत खुलासा किया गया है।
70 लाख तक का रेट कार्ड और बैकएंड सर्वर में सीधे खेल
जांच में सामने आया है कि अयोग्य अभ्यर्थियों के चयन के लिए बाकायदा एक रेट कार्ड निर्धारित था। पीटी पास कराने के लिए 5 लाख, मुख्य परीक्षा व इंटरव्यू के लिए 10 से 15 लाख और अंतिम चयन के लिए 60 से 70 लाख रुपये तक की भारी रकम वसूली जा रही थी। गारंटी के तौर पर अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक दस्तावेज, कोरे चेक और सादे स्टाम्प पेपर जब्त किए जाते थे। अभ्यर्थी परीक्षा में ओएमआर शीट खाली छोड़ देते थे, जिन्हें बाद में स्कैनिंग और बैकएंड सर्वर में सीधी छेड़छाड़ कर भर दिया जाता था।
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गोपनीय आंसर-की लीक और हवाई टिकटों से रिश्वत का खेल
सीआईडी की पड़ताल में यह भी प्रमाणित हुआ है कि आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही परीक्षा की गोपनीय आंसर-की व्हाट्सएप के जरिए लीक की गई थी। इसके एवज में तत्कालीन उप-परीक्षा नियंत्रक और उनके परिवार के सदस्यों के लिए दिल्ली और बेंगलुरु की हवाई टिकटें बुक कराई गई थीं। जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और झारखंड प्रतियोगी परीक्षा अधिनियम, 2023 के कड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में पहली आधिकारिक सुनवाई के लिए 26 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की गई है, जबकि संलिप्त अभ्यर्थियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट जल्द दाखिल की जाएगी।





