Health Adda: ब्रेस्ट कैंसर को अमूमन केवल महिलाओं से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन यह एक चिकित्सीय भ्रांति है। यह गंभीर बीमारी पुरुषों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। हालांकि पुरुषों में इसके मामले महिलाओं की तुलना में काफी कम संख्या में देखने को मिलते हैं, लेकिन सामाजिक झिझक, शर्म और जागरूकता की कमी के कारण पुरुष शुरुआती लक्षणों को अक्सर अनदेखा कर देते हैं। इस लापरवाही के चलते बीमारी का पता काफी उन्नत या जटिल चरण में चलता है, जिससे समय पर सही इलाज शुरू होने में भारी अड़चन आती है।
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दर्द रहित गांठ और निप्पल में बदलाव हैं शुरुआती चेतावनी
पुरुषों में ब्रेस्ट कैंसर का सबसे प्राथमिक और आम लक्षण निप्पल के आसपास या छाती के ऊतकों में एक सख्त, कठोर गांठ का उभरना है। यह गांठ अमूमन दर्द रहित होती है, जिसके कारण अधिकांश पुरुष इसे साधारण सूजन या वसा समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके अलावा निप्पल का अंदर की ओर धंसना (इनवर्टेड निप्पल), छाती की त्वचा पर लगातार लालिमा, पपड़ी जमना या निप्पल से असामान्य अथवा खूनी स्राव होना इस बीमारी के स्पष्ट चेतावनी संकेत हैं। साथ ही कांख (बगल) में किसी नई गांठ या सूजन का उभरना भी कैंसर के फैलाव का संकेत हो सकता है।
गाइनेकोमैस्टिया और कैंसर की गांठ में कैसे समझें फर्क?
चिकित्सकों का कहना है कि छाती में उभरने वाली हर गांठ कैंसर ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। पुरुषों में ‘गाइनेकोमैस्टिया’ नामक स्थिति के कारण भी स्तन के ऊतकों का आकार असामान्य रूप से बढ़ जाता है। यह स्थिति शरीर में हार्मोनल असंतुलन, कुछ विशिष्ट दवाओं के साइड इफेक्ट या मोटापे के कारण पैदा हो सकती है। हालांकि, केवल छूकर या बाहरी रूप से यह तय करना कतई संभव नहीं है कि गांठ सामान्य है या मैलिग्नेंट (घातक)। इसलिए किसी भी लगातार बनी रहने वाली गांठ की डॉक्टरी जांच अनिवार्य है।
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मैमोग्राफी, बायोप्सी और समय पर सटीक उपचार का महत्व
लक्षण दिखने पर डॉक्टर शारीरिक परीक्षण के बाद अल्ट्रासाउंड, पुरुषों की विशेष मैमोग्राफी या एमआरआई की सलाह देते हैं। यदि गांठ में संदिग्ध तत्व दिखाई दें, तो बायोप्सी के जरिए ऊतक का नमूना लेकर अंतिम पुष्टि की जाती है। अधिकांश पुरुषों में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर हार्मोन रिसेप्टर-पॉजिटिव पाए जाते हैं, जिनका उपचार सर्जरी, हार्मोन थेरेपी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी के संयोजन से पूरी तरह संभव है। बीमारी को छिपाने या संकोच करने के बजाय शुरुआती अवस्था में डॉक्टर से परामर्श लेना ही जीवन रक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है।





