Patna: कागजों पर नियम बनाना आसान होता है, लेकिन जमीन पर जब कुदरत की दोहरी मार पड़ती है तो उन नियमों की बेड़ियां तोड़नी ही पड़ती हैं। एक तरफ सैलाब में बहे रास्ते और दूसरी तरफ सूखे खेतों में पसरी मायूसी के बीच अगर सरकारी फाइलों का पहिया घूम जाए, तो मजदूर के चूल्हे की आग बुझने से बच जाती है। त्योहारों के मुहाने पर कार्य विराम की रोक हटाना सिर्फ एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि उन हजारों हाथों को सहारा है जो अपनी ही जमीन पर बेबस खड़े थे।
प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के अकुशल श्रमिकों को आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। ग्रामीण विकास विभाग ने बाढ़ प्रभावित 22 जिलों और सुखाड़ की मार झेल रहे 16 जिलों में ‘विकसित भारत-जी राम जी’ (VB-G RAM G) योजना के तहत लागू कार्य विराम अवधि (लीन पीरियड) की रोक को तत्काल प्रभाव से शिथिल कर दिया है। इस फैसले से राज्य के सभी 38 जिलों में अकुशल कामगारों को स्थानीय स्तर पर नियमित रोजगार उपलब्ध हो सकेगा और त्योहारों के मौसम में घर लौटे प्रवासी श्रमिकों को भी रोजी-रोटी का साधन मिलेगा।
22 जिलों में बाढ़ और 16 जिलों में सूखे की दोहरी मार
विभागीय आकलन के अनुसार, इस वर्ष अरवल, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गोपालगंज, कटिहार, खगड़िया, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, पटना, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, सुपौल और वैशाली जिले भीषण बाढ़ की चपेट में रहे, जिससे सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। वहीं दूसरी ओर अररिया, औरंगाबाद, बांका, गयाजी, जमुई, जहानाबाद, कैमूर, किशनगंज, मधुबनी, नालंदा, नवादा, रोहतास, शेखपुरा, शिवहर, सीतामढ़ी और सीवान में सामान्य से कम बारिश के कारण सूखे की स्थिति बनी, जिससे कृषि श्रमिकों के लिए काम के अवसर घट गए।
कार्य विराम अवधि हटने से क्षतिग्रस्त ढांचों की होगी मरम्मत
पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार, रबी बुआई और कृषि कार्यों में मजदूरों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 22 अक्टूबर से 10 दिसंबर 2026 तक निर्माण कार्यों पर रोक लगाने का नियम था। हालांकि, बाढ़ से टूटी सड़कों, तटबंधों और जल निकासी प्रणालियों की तत्काल बहाली की अनिवार्यता को देखते हुए इस रोक को वापस ले लिया गया है। 1 जुलाई 2026 से प्रभावी इस योजना के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकार के 60:40 अनुपात के बजट से परिसंपत्तियों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे श्रमिकों को उनके अधिकार के तहत 125 दिनों की मजदूरी का लाभ सुनिश्चित होगा।
क्षतिग्रस्त अधोसंरचनाओं का पुनरुद्धार प्राथमिकता: मंत्री श्रवण कुमार
ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य में आई बाढ़ से बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंची है। सड़कों, पुल-पुलियों और तटबंधों का समयबद्ध मरम्मतीकरण अत्यंत आवश्यक है ताकि ग्रामीण संपर्क बहाल हो सके। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में गरीबों और कामगारों को तुरंत रोजगार मुहैया कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिससे विकास की रफ्तार भी तेज होगी और गरीब परिवारों को सीधी आर्थिक मदद मिल सकेगी।





