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WhatsApp पैरेंटल कंट्रोल: 13-17 साल के बच्चों के लिए आए 5 बड़े सेफ्टी फीचर्स

WhatsApp ने 13 से 17 साल के किशोरों की डिजिटल सुरक्षा के लिए पैरेंटल कंट्रोल पेश किया है, जिससे माता-पिता प्रोफाइल फोटो, ग्रुप, चैनल, स्टेटस और मेटा AI सेटिंग्स को नियंत्रित कर सकेंगे।

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New Delhi: किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा और डिजिटल वेलबीइंग को पुख्ता करने की दिशा में मेटा के स्वामित्व वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp ने एक बड़ा कदम उठाया है। व्हाट्सऐप ने 13 से 17 वर्ष आयु वर्ग के किशोरों (टीनएजर्स) के लिए खास ‘पैरेंटल कंट्रोल’ (Parental Control) फीचर की शुरुआत की है।

इस नए सुरक्षा तंत्र के जरिए अब माता-पिता अपने बच्चों की चैट ऐप गतिविधियों पर जरूरी और संतुलित निगरानी रख सकेंगे। इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए बच्चे के अकाउंट को पैरेंटल कंट्रोल सिस्टम से लिंक करने हेतु माता-पिता की आधिकारिक डिजिटल सहमति और मंजूरी को अनिवार्य किया गया है।

प्रोफाइल फोटो, ग्रुप और चैनल पर सीधा नियंत्रण

WhatsApp द्वारा लागू किए गए इस नए सुरक्षा अपडेट के तहत मुख्य रूप से पांच अहम पहलुओं पर अभिभावकों को प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। इनमें प्रोफाइल फोटो, ग्रुप्स, ब्रॉडकास्ट चैनल्स, स्टेटस अपडेट्स और मेटा एआई (Meta AI) से जुड़ी सेटिंग्स शामिल हैं। अब अभिभावक यह निर्धारित कर सकेंगे कि उनके बच्चे की प्रोफाइल फोटो कौन देख सकता है और कौन नहीं। इसके साथ ही, बच्चों को किन ग्रुप्स में जोड़ा जा सकता है और वे किन चैनल्स को फॉलो कर सकते हैं, इस पर भी माता-पिता का सीधा नियंत्रण रहेगा।

ग्रुप साइज का अलर्ट और स्टेटस प्राइवेसी

नए अपडेट में ग्रुप्स के लिए विशेष सुरक्षा स्तर जोड़ा गया है। यदि किसी अनजान या बड़े ग्रुप में 30 या 250 सदस्य शामिल हैं, तो ऐसे ग्रुप्स से जुड़ी गतिविधियों और इनवाइट्स की सीधी सूचना माता-पिता को मिल सकेगी। इसके अलावा, स्टेटस प्राइवेसी के मामले में भी अभिभावकों को अधिकार दिए गए हैं, जिससे वे तय कर सकेंगे कि बच्चा किसका स्टेटस देख रहा है और उसका अपना स्टेटस किन कॉन्टैक्ट्स के साथ साझा किया जा रहा है।

मेटा एआई के लिए 13+ आयु सीमा और सीमित कंटेंट

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते उपयोग को ध्यान में रखते हुए WhatsApp ने मेटा एआई के साथ बच्चों के संवाद को भी सुरक्षित बनाया है। माता-पिता मेटा एआई के लिए ’13+’ या ‘लिमिटेड कंटेंट’ (सीमित सामग्री) सेटिंग चालू कर सकेंगे, जिससे बच्चों के सामने केवल उनकी उम्र के अनुकूल और सुरक्षित जवाब ही आएं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से ऑनलाइन फ्रॉड, साइबर बुलिंग और अनचाहे संपर्कों से किशोरों को सुरक्षित रखने में काफी मदद मिलेगी।

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