Sambhal: संभल हिंसा मामले के आरोपी मोहम्मद अफरोज को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) के तहत हिरासत के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने अफरोज की रासुका हिरासत को रद्द करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। आदेश के बाद मुरादाबाद जेल से रिहा होकर मंगलवार देर रात संभल के दीपा सराय स्थित अपने घर पहुंचे अफरोज ने अदालत के इस फैसले को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया और कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने उनके साथ इंसाफ किया है।
20 महीने बाद जेल से रिहाई और आर्थिक तंगी का दर्द
जेल से बाहर आने के बाद अफरोज ने बताया कि जेल में बिताया गया समय उनके लिए बेहद पीड़ादायक था और इस दौरान उनका परिवार आर्थिक रूप से टूट गया। उन्होंने कहा कि उनके दो भाई लगातार कानूनी पैरवी में जुटे रहे, जबकि बड़े भाई ने उनके बच्चों की शिक्षा का जिम्मा संभाला। अफरोज के बड़े भाई शाहरोज ने यूपी सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि उनके भाई के खिलाफ कोई इलेक्ट्रॉनिक या ऑडियो-वीडियो साक्ष्य मौजूद नहीं था। परिवार को करीब 20 महीने बाद यह राहत मिली है।
केवल NSA से राहत, अन्य आपराधिक मामलों में ट्रायल जारी
इस बीच, जिला शासकीय वकील ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट से मिली यह राहत केवल रासुका के तहत की गई प्रशासनिक हिरासत तक सीमित है। अफरोज के खिलाफ संभल हिंसा से जुड़े अन्य आपराधिक मामलों में कोई छूट नहीं मिली है। शासकीय वकील के मुताबिक, अफरोज मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल है और इससे जुड़ी चार पत्रावलियां जिला न्यायाधीश की अदालत में विचाराधीन हैं। इनमें से दो मामलों में साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब तय तारीख पर आरोपी के बयान दर्ज किए जाएंगे।
नवंबर 2024 की हिंसा और चार मौतों की पृष्ठभूमि
यह पूरा मामला नवंबर 2024 में संभल की ऐतिहासिक शाही जामा मस्जिद के अदालती आदेश पर हुए सर्वेक्षण के दौरान भड़की हिंसा से जुड़ा है। उस दौरान इलाके में हुए भारी पथराव और उपद्रव में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई पुलिसकर्मियों सहित बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इसी मामले में प्रशासन ने अफरोज पर कड़े रासुका के तहत कार्रवाई की थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अनुचित मानते हुए निरस्त कर दिया है।





