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तकनीकी शिक्षा में बिहार की बड़ी उपलब्धि, पॉलिटेक्निक में 98.08% सीटें भरीं

बिहार के सरकारी तकनीकी संस्थानों में छात्रों का भरोसा बढ़ा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में राज्य के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में 94.39 प्रतिशत और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में 98.08 प्रतिशत सीटों पर नामांकन हुआ है।

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पटना। बिहार के सरकारी तकनीकी संस्थानों में छात्रों का भरोसा बढ़ा है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 में राज्य के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में 94.39 प्रतिशत और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में 98.08 प्रतिशत सीटों पर नामांकन हुआ है।

राज्य के 38 राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में बीटेक की कुल 15,183 सीटें हैं। इनमें 14,331 सीटों पर नामांकन हुआ है। वहीं, 46 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों की 17,227 सीटों में से 16,897 सीटों पर डिप्लोमा पाठ्यक्रम में दाखिला हुआ है।

पिछले पांच वर्षों में इंजीनियरिंग कॉलेजों में नामांकन दर लगातार बढ़ी है। वर्ष 2022-23 में यह 65.86 प्रतिशत थी, जो 2023-24 में 72.71 प्रतिशत, 2024-25 में 81.33 प्रतिशत और 2025-26 में 81.52 प्रतिशत रही। 2026-27 में यह बढ़कर 94.39 प्रतिशत हो गई।

पॉलिटेक्निक संस्थानों में भी नामांकन बढ़ा है। 2022-23 में नामांकन दर 84.37 प्रतिशत थी। 2023-24 में यह 84.20 प्रतिशत और 2024-25 में 82.40 प्रतिशत रही। 2025-26 में यह बढ़कर 93.60 प्रतिशत और 2026-27 में 98.08 प्रतिशत हो गई।

कम शुल्क में आधुनिक सुविधाएं

सरकारी तकनीकी संस्थानों में छात्रों को कम शुल्क में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालयों में ट्यूशन फीस 10 रुपये प्रति माह और राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में पांच रुपये प्रति माह है। विद्यार्थियों को बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का भी लाभ मिल सकता है। बीटेक में छात्राओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।

संस्थानों में स्मार्ट क्लास, आधुनिक प्रयोगशालाएं, कार्यशालाएं, भाषा प्रयोगशालाएं, छात्रावास, रोजगारपरक प्रशिक्षण, खेल मैदान, ओपन जिम और स्वास्थ्य उपकेंद्र जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।

इंजीनियरिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, बायोमेडिकल, रोबोटिक्स और डेटा साइंस जैसे नए क्षेत्रों को शामिल किया गया है। पॉलिटेक्निक में फायर टेक्नोलॉजी एंड सेफ्टी, माइनिंग, फूड प्रोसेसिंग, सीएडी/सीएएम और प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं। राज्य के 11 राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के 20 कार्यक्रमों को एनबीए की मान्यता मिल चुकी है।

प्लेसमेंट में भी बड़ी बढ़ोतरी

तकनीकी संस्थानों में प्लेसमेंट की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है। वर्ष 2020-21 में पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग के कुल 1,700 विद्यार्थियों का प्लेसमेंट हुआ था। 2021-22 में यह संख्या 4,681, 2022-23 में 4,944 और 2023-24 में 8,197 हो गई।

वर्ष 2024-25 में कुल 11,178 विद्यार्थियों को रोजगार मिला, जबकि 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 20,477 हो गई। इनमें 14,645 पॉलिटेक्निक और 5,832 इंजीनियरिंग के विद्यार्थी शामिल हैं। पांच वर्षों में प्लेसमेंट की संख्या करीब 12 गुना बढ़ी है। 2025-26 में 4,843 छात्राओं का भी प्लेसमेंट हुआ।

आईआईटी पटना के सहयोग से राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में करीब 122 करोड़ रुपये की लागत से उत्कृष्टता केंद्र विकसित किए जा रहे हैं। यहां इलेक्ट्रिक व्हीकल, ड्रोन टेक्नोलॉजी, 3डी प्रिंटिंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल छात्रों को तकनीकी संस्थानों में प्रवेश दिलाना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसी शिक्षा देना है, जिससे ज्ञान, कौशल, रोजगार और नवाचार को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि बढ़ता नामांकन, प्लेसमेंट, एनबीए मान्यता और आधुनिक सुविधाएं तकनीकी शिक्षा में हो रहे बदलाव को दिखाती हैं।

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