Patna: बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पंचायतों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करने के लिए ‘विकसित भारत-जी राम जी योजना’ (VB-G RAM G) के तहत विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) का खाका तैयार कर लिया गया है। पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में इस योजना के सफल क्रियान्वयन को लेकर एक दिवसीय राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राज्य के सभी जिलों से आए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, अधीक्षण अभियंता, कनीय अभियंता और प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य संदेश था कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब केवल अस्थायी रोजगार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि टिकाऊ और दीर्घकालिक संपत्तियों का निर्माण करना सरकार का प्राथमिक संकल्प है।
पहले होगा अधूरे कार्यों का गैप असेसमेंट, फिर बनेगी नई कार्ययोजना
प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योजना के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी सह आयुक्त अंजनी कुमार ने स्पष्ट किया कि सभी अधिकारी सबसे पहले पंचायतों में पूर्ण हो चुके और अधूरे पड़े विकास कार्यों का गहन सर्वे करेंगे। विकास संबंधी योजनाओं का ‘गैप असेसमेंट’ करने के बाद ही बचे हुए कार्यों के लिए नए सिरे से कार्ययोजना तैयार की जाएगी और उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर पर प्रशिक्षित ये सभी अधिकारी अब अपने-अपने जिलों, अनुमंडलों और प्रखंडों में जाकर पंचायत स्तरीय कर्मियों को प्रशिक्षित करेंगे, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार का व्यवधान न आए।
व्यक्तिगत नहीं, अब बनेगी एकीकृत कार्ययोजना; 375 प्रकार के कार्य शामिल
बिहार ग्रामीण विकास समिति (BRDS) में आईटी एंड ई-गवर्नेंस के निदेशक सरोज कुमार ने प्रेजेंटेशन के जरिए योजनाओं के ऑनलाइन चयन, क्रियान्वयन और पोर्टल पर डेटा अपलोडिंग की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि पहले पंचायतों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत योजनाएं बनती थीं, लेकिन अब अन्य सभी संबंधित विभागों की योजनाओं को समाहित करते हुए एक ‘एकीकृत कार्ययोजना’ (Integrated Plan) बनाई जाएगी। पंचायत स्तर से पारित योजना पहले प्रखंड और फिर जिला स्तर पर अनुमोदन के लिए जाएगी। योजना के तहत विकास कार्यों को चार मुख्य श्रेणियों में बांटकर कुल 375 प्रकार के निर्माण कार्यों को स्वीकृति दी गई है, जो वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन को धरातल पर उतारने में मदद करेंगे।
मनरेगा से अलग मॉडल: सेक्योर 2.0 और भू-ग्राम पोर्टल से निगरानी
योजना के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी अनीश रंजन राव ने मनरेगा और इस नई योजना के बीच का अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि मनरेगा का प्राथमिक लक्ष्य केवल अकुशल श्रमिकों को मजदूरी देना था, जिसमें निर्माण कार्य गौण था। इसके विपरीत, 1 जुलाई 2026 से प्रभावी इस योजना का उद्देश्य रोजगार के साथ-साथ जल सुरक्षा, मुख्य ग्रामीण आधारभूत संरचना, आजीविका संवर्धन, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से जुड़े ठोस ढांचे तैयार करना है। योजना में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्राकलन तैयार करने में ‘सेक्योर 2.0’ (SECURE 2.0) सॉफ्टवेयर और सभी कार्यों की रियल-टाइम सैटेलाइट निगरानी के लिए ‘भू-ग्राम’ पोर्टल की मदद से जियो-टैगिंग अनिवार्य की गई है।




