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गंगा से गाद हटाने की तैयारी, डॉल्फिन के आशियाने पर मंडराया संकट

इस साल बाढ़ के बाद भागलपुर में ध्वस्त तटबंधों के सामने गंगा नदी में जमा बालू और गाद हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए नदी में ड्रेजिंग की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे नदी का जलप्रवाह

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भागलपुर : इस साल बाढ़ के बाद भागलपुर में ध्वस्त तटबंधों के सामने गंगा नदी में जमा बालू और गाद हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए नदी में ड्रेजिंग की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे नदी का जलप्रवाह बेहतर होगा और बाढ़ व कटाव से राहत मिल सकती है।

हालांकि, पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों ने ड्रेजिंग को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग से गंगा नदी के जलीय जीवों और खासकर गांगेय डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास पर असर पड़ सकता है।

भागलपुर में सुल्तानगंज से कहलगांव तक का क्षेत्र विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य के रूप में संरक्षित है। पर्यावरणविदों के अनुसार ड्रेजिंग के दौरान मशीनों से होने वाला तेज शोर डॉल्फिन को प्रभावित कर सकता है। डॉल्फिन दिशा और शिकार के लिए ध्वनि तरंगों पर निर्भर रहती हैं।

तलहटी से गाद और बालू हटाने से पानी में मटमैलापन बढ़ सकता है। इससे जलीय जीवों के लिए परिस्थितियां बदल सकती हैं। नदी की तलहटी में मौजूद गाद और बालू कई छोटी मछलियों और अन्य जलीय जीवों का आवास हैं, जो डॉल्फिन के भोजन का हिस्सा हैं।

जानकारों ने बताया कि पहले कहलगांव-पीरपैंती के रानी दियारा इलाके में ड्रेजिंग का प्रयोग किया गया था। इसके बाद नदी की धारा में बदलाव और कटाव की शिकायत सामने आई थी। ग्रामीणों के विरोध के बाद काम रोक दिया गया था।

पर्यावरणविद् दीपक कुमार ने ड्रेजिंग से पहले डॉल्फिन और नदी की धारा पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन कराने की मांग की है। पर्यावरणविदों का कहना है कि बाढ़ और कटाव से निपटने के लिए ऐसी योजना बनाई जानी चाहिए, जिससे नदी के साथ-साथ डॉल्फिन और अन्य जलीय जीवों का संरक्षण भी हो सके।

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