नई दिल्ली। टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड ने एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद पर पांच साल का नया कार्यकाल देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बोर्ड बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट किया।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है। बताया गया था कि अगस्त में उन्होंने कार्यकाल खत्म होने के बाद आगे पद पर नहीं रहने की इच्छा जताई थी। हालांकि, अब बोर्ड ने उनके नए कार्यकाल के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
दोबारा नियुक्ति की खबर के बाद टाटा समूह की कई कंपनियों के शेयरों में तेजी देखने को मिली।
टाटा संस की लिस्टिंग पर भी चर्चा
बोर्ड बैठक में टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में टाटा संस के कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था। RBI के नियमों के अनुसार, अपर-लेयर NBFC के रूप में वर्गीकृत कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग जरूरी है।
टाटा संस ने पहले इस दायित्व से बचने के लिए करीब 21,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाया था। लेकिन जून 2026 में बदले नियमों के तहत 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक एसेट वाली कंपनियां स्वतः अपर-लेयर में शामिल हो जाती हैं।
लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों की अलग-अलग राय
टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर कंपनी के प्रमुख शेयरधारकों के विचार अलग-अलग हैं। टाटा ट्रस्ट्स के पास 65 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और वह लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है।
वहीं, करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला शापूरजी पालोनजी (SP) समूह टाटा संस की सार्वजनिक लिस्टिंग की मांग कर रहा है।
लिस्टिंग होने की स्थिति में टाटा संस के वित्तीय फैसलों और पूंजी के इस्तेमाल पर सार्वजनिक निगरानी बढ़ सकती है।




