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पासबुक, SMS से लेकर नंबर बदलने तक फीस! जानिए कैसे बैंक काट रहे आपका पैसा

भारतीय बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में विभिन्न बैंकिंग सेवाओं और जुर्माने से 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड आय दर्ज की है।

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New Delhi: देश में बैंकिंग सेवाओं के तेजी से डिजिटल और ऑनलाइन होने के बावजूद आम खाताधारकों पर तरह-तरह के सेवा शुल्कों और पेनाल्टी का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (जून तिमाही) में भारतीय बैंकों ने विभिन्न प्रकार की फीस और शुल्कों के जरिए सालाना आधार पर 12 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की बंपर कमाई की है। दूसरी ओर, खाताधारक रोजमर्रा की बुनियादी सेवाओं पर लगने वाले शुल्कों को लेकर खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

बुनियादी सेवाओं से लेकर जुर्माने तक पर नजर

बैंकों द्वारा खाते में न्यूनतम औसत शेष (मिनिमम बैलेंस) न रखने, चेक बाउंस होने, निर्धारित सीमा से अधिक एटीएम निकासी करने, अतिरिक्त चेकबुक जारी करने और डुप्लीकेट पासबुक बनवाने जैसी सामान्य सेवाओं पर अलग-अलग दर से शुल्क वसूला जा रहा है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक सभी बैंकों के लिए अपने सेवा शुल्कों की जानकारी पारदर्शी तरीके से ग्राहकों को पहले उपलब्ध कराना अनिवार्य है। यह दरें बैंक, खाते की श्रेणी और बैंक के आंतरिक नियमों के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।

किस बैंकिंग सेवा पर कितना लग रहा है शुल्क?

बैंकों द्वारा विभिन्न सेवाओं पर वसूले जाने वाले प्रमुख शुल्कों की सूची इस प्रकार है:

  • एटीएम वार्षिक शुल्क: ₹150 से ₹300 + जीएसटी

  • एटीएम निकासी (5 बार के बाद): ₹21 से ₹23 + जीएसटी प्रति ट्रांजैक्शन

  • एटीएम से अधिक राशि निकालने का प्रयास: ₹20 से ₹25 तक

  • चेक बुक जारी करने का शुल्क और डिलीवरी चार्ज: ₹200 से ₹300 तक
  • बैंक शाखा से नकद निकासी (4 बार के बाद): ₹150 तक

  • न्यूनतम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी: ₹100 से ₹600 तक

  • चेक बाउंस होने पर: ₹250 से ₹500 तक जुर्माना

  • मोबाइल एसएमएस अलर्ट: ₹15 से ₹20 प्रति तिमाही

  • अतिरिक्त चेकबुक (25 पन्नों के बाद): ₹2.5 प्रति पन्ना

  • एनईएफटी / आरटीजीएस (शाखा से): ₹2 से ₹25 तक

  • खाता बंद कराने पर शुल्क: ₹200 से ₹500 तक

  • डुप्लीकेट पासबुक जारी करना: ₹100

  • हस्ताक्षर सत्यापन (सिग्नेचर वेरिफिकेशन): ₹100

  • मोबाइल नंबर या ई-मेल अपडेट करना: ₹50 + जीएसटी

  • डेबिट कार्ड वार्षिक रखरखाव: ₹250 से ₹800 तक

विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटाइजेशन का प्राथमिक उद्देश्य बैंकिंग लागत को कम करना था, लेकिन सेवा शुल्कों की इस लंबी फेहरिस्त ने मध्यम और निम्न आय वर्ग के ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।

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